महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों ने मुंबई में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने महाराष्ट्र की राज्य सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। दरअसल, कर्मचारी लंबे समय से हड़ताल पर हैं और विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के बीच सुप्रिया सुले ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि आजाद मैदान में आंदोलन कर रहे सौ से अधिक कर्मचारी अचानक एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के दक्षिण मुंबई स्थित घर सिल्वर ओक आ धमके। कर्मचारियों ने पवार के घर पर जोरदार प्रदर्शन किया। कुछ कर्मचारियों ने पवार के घर पर पत्थर और चप्पल फेंके] तो महिला कर्मचारियों ने अपनी चूड़ियां फोड़कर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कहा कि कई महीने से वह आंदोलन कर रहे हैं लेकिन पवार ने उनकी मांगो के संदर्भ में कुछ भी नहीं किया। कर्मचारी राज्य सरकार के साथ निगम के विलय की मांग कर रहे हैं और इसको लेकर नवंबर 2021 से हड़ताल पर हैं। इससे पहले गुरुवार को बांबे हाईकोर्ट ने भी कहा था कि निगम के विलय की मांग जायज नहीं है। इसलिए हड़ताली कर्मचारी काम पर लौटें।
वहीं, अदालत के निर्देश के बाद परिवहन मंत्री अनिल परब ने आश्वासन दिया था कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार निर्धारित समय सीमा के भीत काम पर लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी बीच, शुक्रवार को परिवहन कर्मचारी सैकड़ों की संख्या में पूर्व केंद्रीय मंत्री के वरली स्थित आवास सिल्वर ओक पहुंचकर नारेबाजी कर जोरदार आंदोलन किया। एक आंदोलनकारी ने कहा कि शरद पवार ने हमारे मुद्दों को सुलझान के लिए कुछ नहीं किया जबकि वे महा विकास आघाड़ी सरकार के शिल्पकार हैं। इस दौरान 120 कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। इसके लिए शरद पवार ही जिम्मेदार हैं।
अदृश्य शक्तियां कर रही राज्य को अस्थिर करने का प्रयास: पाटिल
एमएसआरटीसी के कर्मचारियों के शरद पवार के आंदोलन पर गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने कहा कि इस आंदोलन में अदृश्य शक्तियों का हाथ है। उन्होंने कहा कि ये अदृश्य शक्तियां महाराष्ट्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं। पाटिल ने कहा कि मुंबई पुलिस आयुक्त को मामले की जांच का आदेश दिया गया है। जो भी इसका सूत्रधार होगा उसे दंडित किया जाएगा। वहीं, शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि राज्य में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जिसने भी कर्मचारियों को भड़काया है उसका बंदोबस्त करना जरूरी है।
107 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
पुलिस ने गामदेवी थाने में दंगा और साजिश रचने के आरोप में 107 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों में 23 महिलाएं हैं। एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने हड़ताली कार्यकर्ताओं के नेता अधिवक्ता गुणरत्न सदावर्ते को भी घटना के संबंध में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। बाद में अपने आवास से कार से निकलते दिखे पवार ने एक वीडियो संदेश में कहा कि एमएसआरटीसी कर्मियों को नासमझ नेतृत्व ने गुमराह किया।
सुप्रिया सुले ने समझाने की कोशिश की
सुले ने प्रदर्शनकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि मैं आपके साथ बातचीत करने के लिए तैयार हूं। कृपया सहयोग करें। मेरे पिता, मां और बेटी घर के अंदर हैं। मैं आपके साथ बातचीत करने के लिए तैयार हूं। मुझे पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने दें। पवार की पार्टी राकांपा ने उनका एक वीडियो साझा किया जिसमें वह कह रहे हैं कि जो कुछ भी हुआ उससे किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नेता विवेकशील नहीं होता है, तो उसका कर्मियों पर असर होता है। हमने यहां उसका दृष्टांत देखा है। हम कर्मचारियों के साथ है, लेकिन हम गलत नेतृत्व के साथ नहीं हैं। यदि कोई उन्हें गलत मार्ग दिखा रहा है तो उसका विरोध करना हमारी जिम्मेदारी है।
सीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पुलिस विभाग को यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार के आवास पर हमले में शामिल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का शुक्रवार को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मैंने गृह मंत्री से हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। इस घटना के बाद किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी भी हड़ताली कर्मचारियों की वास्तविक मांगों की अनदेखी नहीं की। उन्होंने कहा कि बम्बई उच्च न्यायालय ने भी कर्मचारियों को काम पर वापस लौटने को कहा है।
पक्ष-विपक्ष ने की घटना की निंदा
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पवार के आवास के बाहर की घटना हर तरह से गलत है और इस तरह के आंदोलन का समर्थन नहीं किया जा सकता। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि विरोध उन लोगों द्वारा किया गया था जिनके लिए महाराष्ट्र में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस सरकार आंखों में किरकिरी है।