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हमेशा मोर्चे पर महिलाएं... हवाई हमलों से लेकर युद्ध में दुश्मन के छक्के छुड़ाने तक

Tue, 18 Feb 2020 02:34 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्थायी कमीशन पर याचिका में प्रस्तुत की गई इन अधिकारियों की उपलब्धियों और कहानियों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आधार बनाया। पढ़िए इन महिला अफसरों और उनकी उपलब्धियों के बारे में...
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एसएम मेजर मिताली मधुमिता और स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेना में शामिल महिला अधिकारियों ने समय-समय पर अपने कर्तव्य निभाते हुए अनुकरणीय साहस का प्रदर्शन किया है। इसके लिए उन्हें कई विशिष्ट सेवा सम्मान मिले। स्थायी कमीशन पर याचिका में प्रस्तुत की गई इन अधिकारियों की उपलब्धियों और कहानियों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आधार बनाया। पढ़िए इन महिला अफसरों और उनकी उपलब्धियों के बारे में -

एसएम मेजर मिताली मधुमिता : हमले में क्षतिग्रस्त दूतावास पहुंचीं और घायलों को बचाया

फरवरी 2011 में मेजर मिताली मधुमिता (आर्मी एजूकेशन कोर) को सेना मेडल वीरता पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान पाने वाली मिताली पहली महिला सैन्य अधिकारी हैं। 2000 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में शामिल मिताली ने 26 फरवरी 2010 को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए फिदायीन हमले के समय वीरता और साहस का परिचय दिया।

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वे काबुल में अंग्रेजी सिखा रही टीम की लीडर थीं। हमले की सूचना मिली तो घटनास्थल पर रवाना हो गईं। लेकिन अफगान सुरक्षाकर्मियों ने उनकी गाड़ी रोक दी। लेकिन वे नहीं रुकीं, वे अपने जीवन की परवाह न करते हुए पैदल ही घटनास्थल पर पहुंची। घायलों को अस्पताल पहुंचाया। मिताली ने इतनी तेजी से काम किया कि कई लोगों की जान बचाने में कामयाब रहीं।

स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल : पाकिस्तानी पायलट नहीं पार पा सके फाइटर कंट्रोलर से

2019 में वायुसेना के बालाकोट हवाई हमले से बौखलाए पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में अपने लड़ाकू विमान भेजने का दुस्साहस किया। लेकिन वायुसेना की सजगता से कामयाब नहीं हो सका। इसे रोकने में स्क्वाड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल ने अहम भूमिका निभाई। इस दौरान भारतीय लड़ाकू पायलट जहां दुश्मन को सबक सिखाने आसमान में मुस्तैद थे वहीं फाइटर कंट्रोलर के रूप में तैनात मिंटी अग्रवाल और उनकी टीम इन पायलटों का बेहतरीन मार्गदर्शन किया।

वे उस टीम में शामिल थीं, जिसने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू जेट को मिग-21 बाइसन से मार गिराने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान का मार्गदर्शन किया। इस दौरान मिंटी ने अभिनंदन को दुश्मन के विमानों की सटीक लोकेशन मुहैया करवाई। पाकिस्तान के दो एफ-16 विमानों का पीछा कर रहे अभिनंदन को टारगेट लॉक कर उसे मार गिराने में इससे मदद मिली। मिंटी को इस सेवा के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त 2019 में  युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया।

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कैप्टन दिव्या अजित कुमार : 244 महिला-पुरुष कैडेट्स में सर्वश्रेष्ठ चुनी गईं

कैप्टन दिव्या अजित कुमार - फोटो : अमर उजाला
दिव्या कुमार सितंबर 2010 में सेना की एयर डिफेंस कॉर्प्स में शामिल हुई थीं। केवल 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने सेना की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में 244 महिला और पुरुष कैडेट्स के बीच सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड कैडेट चुना गया था। साथ ही उन्हें प्रतिष्ठित ‘सोर्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान की गई। इस सम्मान को पाने के लिए उन्होंने पीटी टेस्ट, तैराकी टेस्ट, फील्ड ट्रेनिंग, सर्विस सब्जेक्ट्स, बाधा ट्रेनिंग, ड्रिल टेस्ट, क्त्रसॅस कंट्री, आदि क्षेत्रों में खुद को श्रेष्ठ साबित किया। दिव्या ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली भारतीय सेना के इतिहास की पहली महिला अधिकारी हैं। उन्होंने कैप्टन के रूप में 2015 की गणतंत्र दिवस परेड में 154 महिला व पुरुष कैडेट्स के दस्ते का नेतृत्व किया।

गुंजन सक्सेना : शौर्य वीर अवार्ड पाने वाली पहली महिला पायलट

फ्लाइट ऑफिसर गुंजन सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
1994 में वायुसेना की पहली 25 ट्रेनी पायलट के रूप में जुड़ीं गुंजन कारगिल युद्ध के समय 12 से अधिक बार चीता हेलिकॉप्टर लेकर रणभूमि में पहुंचीं। यहां उन्होंने हथियार व रसद पहुंचाए और वापसी में घायल सैनिकों को साथ लेकर आईं। कारगिल में ऊंची चोटियों पर काबिज पाकिस्तानी सैनिक न केवल भारतीय सैनिकों के लिए चुनौती बने हुए थे, बल्कि घायलों को मदद पहुंचाने के लिए चल रहे मिशन पर भी गोलियां और मिसाइलें दाग रहे थे।

इन सबके बीच फ्लाइट ऑफिसर गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की ऐसी पहली महिला अधिकारी बनीं जिन्होंने रणभूमि में मिशन को अंजाम दिए। इस दौरान उनके हेलिकॉप्टर पर पाकिस्तानियों ने मिसाइल दागीं, लेकिन वे उन्हें चकमा देने में कामयाब रहीं। इस अदम्य साहस के प्रदर्शन के लिए गुंजन देश की पहली शौर्य वीर अवार्ड विजेता बनीं। यह पुरस्कार दुश्मन से सीधे एक्शन में उलझे बिना दर्शाई गई वीरता व त्याग के लिए दिया जाता है।
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छह महिला नौसैनिकों ने 10-10 मीटर ऊंची लहरों पर फंदे डाल दुनिया नापी

महिला नौसैनिकों ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ मिशन के जरिए पूरी दुनिया नाप डाली - फोटो : अमर उजाला
भारतीय नौ सेना के 55 फीट आकार के जहाज आईएनएसवी तारिणी में छह महिला नौसैनिकों ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ मिशन के जरिए पूरी दुनिया नाप डाली। ले. कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में इस टीम में ले. कमांडर प्रतिभा जायसवाल, ले. सबऑर्डिनेट्स पी स्वाथि, विजया देवी, बी ऐश्वयाऔर पायल गुप्ता शामिल हुईं। 

10 सितंबर 2017 से 21 मई 2018 यानी 254 दिन में 21600 हजार नॉटिकल मील की दूरी तय करते हुए इन सभी ने समुद्र के जरिए पृथ्वी का चक्कर लगाया। इस दौरान जहां उनका सामना 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं से हुआ तो राह में 10-10 मीटर ऊंची लहरें भी बाधा न बन सकीं।

लेकिन उन्होंने केवल तकनीकी वजहों से चार जगह अपने जहाज को रोका। उनकी इस सफलता ने विश्व को भारत और भारतीय महिलाओं की शक्ति से परिचित करवाया। इसके लिए राष्ट्रपति ने उन्हें नौ-सेवा वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
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