कैप्टन दिव्या अजित कुमार
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दिव्या कुमार सितंबर 2010 में सेना की एयर डिफेंस कॉर्प्स में शामिल हुई थीं। केवल 21 वर्ष की उम्र में उन्होंने सेना की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में 244 महिला और पुरुष कैडेट्स के बीच सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड कैडेट चुना गया था। साथ ही उन्हें प्रतिष्ठित ‘सोर्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान की गई। इस सम्मान को पाने के लिए उन्होंने पीटी टेस्ट, तैराकी टेस्ट, फील्ड ट्रेनिंग, सर्विस सब्जेक्ट्स, बाधा ट्रेनिंग, ड्रिल टेस्ट, क्त्रसॅस कंट्री, आदि क्षेत्रों में खुद को श्रेष्ठ साबित किया। दिव्या ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली भारतीय सेना के इतिहास की पहली महिला अधिकारी हैं। उन्होंने कैप्टन के रूप में 2015 की गणतंत्र दिवस परेड में 154 महिला व पुरुष कैडेट्स के दस्ते का नेतृत्व किया।
फ्लाइट ऑफिसर गुंजन सक्सेना
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1994 में वायुसेना की पहली 25 ट्रेनी पायलट के रूप में जुड़ीं गुंजन कारगिल युद्ध के समय 12 से अधिक बार चीता हेलिकॉप्टर लेकर रणभूमि में पहुंचीं। यहां उन्होंने हथियार व रसद पहुंचाए और वापसी में घायल सैनिकों को साथ लेकर आईं। कारगिल में ऊंची चोटियों पर काबिज पाकिस्तानी सैनिक न केवल भारतीय सैनिकों के लिए चुनौती बने हुए थे, बल्कि घायलों को मदद पहुंचाने के लिए चल रहे मिशन पर भी गोलियां और मिसाइलें दाग रहे थे।
इन सबके बीच फ्लाइट ऑफिसर गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना की ऐसी पहली महिला अधिकारी बनीं जिन्होंने रणभूमि में मिशन को अंजाम दिए। इस दौरान उनके हेलिकॉप्टर पर पाकिस्तानियों ने मिसाइल दागीं, लेकिन वे उन्हें चकमा देने में कामयाब रहीं। इस अदम्य साहस के प्रदर्शन के लिए गुंजन देश की पहली शौर्य वीर अवार्ड विजेता बनीं। यह पुरस्कार दुश्मन से सीधे एक्शन में उलझे बिना दर्शाई गई वीरता व त्याग के लिए दिया जाता है।
महिला नौसैनिकों ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ मिशन के जरिए पूरी दुनिया नाप डाली
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भारतीय नौ सेना के 55 फीट आकार के जहाज आईएनएसवी तारिणी में छह महिला नौसैनिकों ने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ मिशन के जरिए पूरी दुनिया नाप डाली। ले. कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में इस टीम में ले. कमांडर प्रतिभा जायसवाल, ले. सबऑर्डिनेट्स पी स्वाथि, विजया देवी, बी ऐश्वयाऔर पायल गुप्ता शामिल हुईं।
10 सितंबर 2017 से 21 मई 2018 यानी 254 दिन में 21600 हजार नॉटिकल मील की दूरी तय करते हुए इन सभी ने समुद्र के जरिए पृथ्वी का चक्कर लगाया। इस दौरान जहां उनका सामना 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं से हुआ तो राह में 10-10 मीटर ऊंची लहरें भी बाधा न बन सकीं।
लेकिन उन्होंने केवल तकनीकी वजहों से चार जगह अपने जहाज को रोका। उनकी इस सफलता ने विश्व को भारत और भारतीय महिलाओं की शक्ति से परिचित करवाया। इसके लिए राष्ट्रपति ने उन्हें नौ-सेवा वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।