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अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों पर नोटबंदी का असरः टैक्स कटौती से मिलेगी बड़ी मदद

Wed, 07 Dec 2016 01:18 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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नोटबंदी के बाद हर किसी के मन में ये सवाल उठ रहा है कि अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हुआ है। छोटे और मंझोले कारोबार एक तरीके से ठप पड़े हैं। सेंसेक्स लगातार नीचे जा रहा है और बाजार में मंदी को महसूस किया जा रहा है। अर्थव्यवस्था, नौकरी और महत्वपूर्ण सेक्टरों पर नोटबंदी के प्रभाव को जानने के लिए अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स ने दर्जनों पंडितों, बाजार विशेषज्ञों से बात कर इसको खंगाला है। इसमें से जो महत्वपूर्ण चीज निकल कर आई है वो ये है कि सरकार को बाजार में सकारात्मक रुझान पैदा करने के लिए कई कदम उठाने होंगे और इसके लिए टैक्स में कटौती के साथ मांग पूर्ति को बढ़ाने के लिए अहम कदम उठाने होंगे। 
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अर्थव्यवस्था
प्रभावः अच्छे मानसून के चलते ग्रामीण भारत में मांग बढ़ने और सातवें वेतन आयोग के चलते शहरी क्षेत्रों में खरीददारी बढ़ रही थी, लेकिन नोटबंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को पनडुब्बी की रफ्तार में ला दिया है, जबकि यह क्रूज की रफ्तार भरने को तैयार थी। 8 प्रतिशत की विकास दर जो एक समय हासिल की जा सकने वाली थी और कोसों दूर दिख रही है। बैन की गई करेंसी का एक चौथाई हिस्सा ही सर्कुलेशन में वापस आ पाया है। छोटी करेंसी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है, जिससे ट्रांजेक्शन हो सके। मांग में गिरावट आने वाले समय में भी निवेश को कमजोर करेगी। मंडल (ambit) का कहना है कि वित्त वर्ष 2017 में विकास दर में 3.5 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि अन्य लोग इतने निराशावादी नहीं है और उनका मानना है कि यह 7 प्रतिशत से नीचे नहीं जाएगी।

ताजा स्थितिः बहुत ही नकारात्मक 

समाधानः बाजार के रुझान को बढ़ाना होगा। कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत कटौती कर डिमांड को हवा दी जा सकती है। इनकम टैक्स के स्लैब को भी बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही ब्याज में छूट देकर कम ब्याज दर पर हाउसिंग लोन उपलब्ध कराया जा सकता है। नोटबंदी से वापस आई राशि को पब्लिक इन्वेस्टमेंट में लगााया जाना चाहिए। आने वाला बजट अर्थव्यवस्था के भविष्य को निर्धारित करेगा। 
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नौकरियां 
प्रभावः नियुक्ति विशेषज्ञों का कहना है कि सीनियर लेवल पर नौकरियां नहीं हैं और इन पर कोई प्रभाव नहीं होगा, लेकिन कुल मिलाकर नियुक्ति में गिरावट आई है। मैनेजर रेवेन्यू और प्रॉफिट टारगेट को प्रोटेक्ट करने की फिराक में है। हालांकि अभी तक नौकरी में कटौती की कोई योजना नहीं है, लेकिन इंक्रीमेंट पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में नौकरियों की गठना करना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिटेल, उपभोक्ता सामान, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ऑटो और बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के क्षेत्र में नौकरियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। दूसरी ओर मोबाइल वॉलेट और वित्त टेक्नोलॉजी कंपनियों में नौकरियों बढ़ी हैं।

ताजा स्थितिः हल्का नकारात्मक, भविष्य में बेहतर होने की उम्मीद

समाधानः सबकुछ इस पर निर्भर है कि नोटबंदी का असर कितना रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरियों के लिए फंडामेंटल्स बढ़िया हैं। एक बदलाव यह देखा जा सकता है कि असंगठित क्षेत्र की नौकरियों पर नोटबंदी के चलते सबसे ज्यादा मार पड़ी है। नौकरी पेशा 60 करोड़ भारतीयों में 6 करोड़ संगठित क्षेत्र में हैं। अगले 2-3 सालों में यह बढ़कर 10 करोड़ हो सकती है। 

 
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उपभोक्ता खर्च पर नोटबंदी का कितना असर?

प्रभावः कंपनियों और विश्लेषकों का कहना है कि उपभोग, जीडीपी में सबसे ज्यादा योगदान देता है। अगली दो तिमाही तक कम से कम इस पर असर रह सकता है। दो मुख्य समस्या हैः इनमें पहली छोटी करेंसी का प्रवाह कम होना, यह कुछ समय के लिए हो सकता है, लेकिन यह बड़ी खरीददारी को प्रभावित कर रहा है। नवंबर में एफएमसीजी में 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। स्टोर के स्तर पर देखें, तो दाल, स्नैक, बिस्किट की खरीददारी पर भी बहुत असर पड़ा है। होलसेल के मार्केट पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। बड़े रिटेल फर्म बेहतर कर रहे हैं। ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर अच्छा कर रहा है और इसकी सालाना ग्रोथ 4.4 प्रतिशत है। एफएमसीजी कंपनियां अपने प्रोडक्शन में कटौती कर सकती हैं। हालांकि सप्लाई चेन पर भी असर पड़ सकता है, इसका पूरा असर महीने भर बाद ही पता चल सकेगा। 

ताजा स्थितिः नकारात्मक, छोटी अवधि में यह और बिगड़ेगा

समाधानः इस पर निर्भर करता है कि कितने उपभोक्ता कैशलेस ट्रांजेक्शन पर शिफ्ट हुए हैं। इसके साथ ही यह भी मायने रखता है कि कितने रिटेलर ऐसा करते हैं। कुछ उपभोक्ता सेक्टर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार को खरीददारी को बढ़ावा देना चाहिए। जन धन अकाउंट को शॉपिंग वाउचर्स देना एक आइडिया हो सकता है। उपभोक्ता अगर एक बार फिर से बेहतर महसूस करता है, तो ज्यादा अच्छा होगा। टैक्स में कटौती सबसे बड़ी मदद होगी। 
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