फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असम में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती- पार्टी के अंदर से उठ रही है सोनोवाल को हटाने की मांग

Thu, 14 Jun 2018 07:34 AM IST
शरद गुप्ता, नई दिल्ली
विज्ञापन
सर्बानंद सोनोवाल
विज्ञापन
उत्तर पूर्व के सात में से छह में सरकार बनाने वाली बीजेपी के सामने क्षेत्र के सबसे बड़े राज्य असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के रूप में एक बड़ी चुनौती सामने आई है। पूरे राज्य में विधेयक के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति इस विधेयक पर रायशुमारी के लिए पिछले पांच दिनों के दौरे पर असम में ही है। इसी दौरान कांग्रेस, असम गण परिषद, आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) जैसे राज्य के सभी संगठन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
विज्ञापन


वहीं, उपमुख्यमंत्री हिमंत बिस्वसरमा से जुड़ा भाजपा का ही एक धड़ा केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दे रहा है कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल इस विरोध को ठीक तरह से नहीं संभाल पा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे नाज़ुक हालात में सोनोवाल की जगह  किसी मजबूत व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। हिमंत इससे पहले वाली कांग्रेस सरकार में भी उपमुख्यमंत्री थे। लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से मतभेदों के चलते वे सरकार छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें असम की ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर पूर्व की जिम्मेदारी दे दी। उन्होंने इस क्षेत्र में छह राज्यों की सरकार भाजपा की सहायता से बनवाई। लेकिन अब उनकी महत्वाकांक्षा फिर जोर पकड़ रही है।

असम विधानसभा में नेता विपक्ष देवब्रत साइकिया ने अमर उजाला को बताया कि कांग्रेस और आल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने सोनोवाल को प्रस्ताव दिया है कि यदि वे जातीय नेता की छवि बचाना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा छोड़ देनी चाहिए और विपक्ष के सहयोग से मुख्यमंत्री बनना चाहिए। बिस्वसरमा से कई प्रयासों के बाद भी बात नहीं हुई।
विज्ञापन


क्या है नागरिकता विधेयक

दो साल पहले लाए इस विधेयक में कहा गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, बौद्ध, सिख, ईसाई, जैन और पारसी लोगों को भारत की नागरिकता दी जा सकती है। इसके लिए पहले से निर्धारित भारत में 12 साल रहने की शर्त को घटाकर सात साल कर दिया गया है।

क्यों हो रहा है विरोध

असम के लोगों का कहना है कि यह 1985 के असम समझौते का उल्लंघन कर रहा है। इसमें कहा गया था कि 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आए लोगों को घुसपैठिया मान कर देश से निकाल दिया जाएगा। यह विधेयक मुसलमानों को अवैध घुसपैठिया करार दे नागरिकता के लिए अयोग्य ठहरा रहा है। इसे अन्य दल धार्मिक आधार पर भेदभाव बता रहे हैं।

नागरिकता रजिस्टर 30 को आएगा

राज्य सरकार 30 जून को राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर सार्वजनिक करेगी। इससे मालूम चलेगा कि कितने लोग 1971 के बाद असम में बसे। यह भी एक विस्फोटक मुद्दा होगा। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें