कीटनाशक प्रबंधन बिल में भी बदलाव की मांग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कृषि कानूनों के बाद अब कीटनाशक प्रबंधन बिल में भी बदलाव जोर पकड़ रही है। ये मांग किसान नहीं, बल्कि कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों ने की है। कीटनाशक प्रबंधन बिल, 2020 बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पेश किया गया था और अगले बजट सत्र में इसे पारित करने की संभावना है।
कंपनियों का मानना है कि इस कानून से उनके कारोबार पर असर पड़ेगा। कीटनाशक निर्माताओं के संगठन क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीसीएफआई) का कहना है कि बिल में बहुत सी बातों को अस्पष्ट रखा गया है जिससे इंस्पेक्टर राज के लौटने की आशंका है।
सीसीएफआई की तकनीकी कमेटी के अध्यक्ष अजीत कुमार ने कहा कि बिल में सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं बताई गई है, लेकिन यदि सैंपल दोषपूर्ण पाया गया तो निर्माता को जुर्माने के साथ ही जेल की सजा का भी प्रावधान है। साथ ही कंपनी का लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा। यदि कोई कंपनी 40-45 उत्पाद बनाती है तो एक सैंपल खराब पाए जाने पर पूरी फैक्टरी बंद कर देना कितना उचित है।
संगठन ने बिल में 15 कमियां निकाली हैं और इन्हें दूर करने के लिए सरकार से लेकर विपक्ष तक अर्जी लगा रहे हैं। लेकिन चूंकि विधेयक संसद में पेश हो चुका है इसलिए सभी ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। अजीत के मुताबिक, अगर यह बिल कानून बनता है तो भारत की आधी से ज्यादा कीटनाशक निर्माता इकाइयां बंद होने के कगार पर होंगी।
20 हजार करोड़ का है निर्यात
भारत दुनिया में चौथा सबसे बड़ा कीटनाशक निर्माता देश है और एशिया का सबसे बड़ा। हर वर्ष 40 हजार करोड़ रुपये का 9 लाख टन कीटनाशक बनाया जाता है। इसमें से आधे से ज्यादा निर्यात किया जाता है। देश में सबसे अधिक कीटनाशक धान (28 प्रतिशत) और कपास (20 प्रतिशत) की फसल में इस्तेमाल होते हैं।