सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर म्यांमार के सभी रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों को स्थानीय स्कूलों में प्रवेश दिलाने की मांग की गई। एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 29 अक्तूबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए फैसला सुनाया था कि चूंकि रोहिंग्या विदेशी हैं, जिन्हें कानूनी रूप से भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए याचिकाकर्ता को गृह मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए। अदालत ने मंत्रालय को मामले को कानून के अनुसार निपटाने व उस पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत में एनजीओ ने याचिका में दावा किया कि मंत्रालय के समक्ष 4 नवंबर को पूरा मामला रखा गया। इसके बाद 28 नवंबर को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है।