फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC Updates: रोहिंग्या बच्चों को स्कूलों में प्रवेश की मांग पहुंची सुप्रीम कोर्ट; टीडीएस के खिलाफ याचिका हुई द

Fri, 27 Dec 2024 04:25 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर म्यांमार के सभी रोहिंग्या शरणार्थी बच्चों को स्थानीय स्कूलों में प्रवेश दिलाने की मांग की गई। एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 29 अक्तूबर 2024 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए फैसला सुनाया था कि चूंकि रोहिंग्या विदेशी हैं, जिन्हें कानूनी रूप से भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए याचिकाकर्ता को गृह मंत्रालय से संपर्क करना चाहिए। अदालत ने मंत्रालय को मामले को कानून के अनुसार निपटाने व उस पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत में एनजीओ ने याचिका में दावा किया कि मंत्रालय के समक्ष 4 नवंबर को पूरा मामला रखा गया। इसके बाद 28 नवंबर को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

टीडीएस के खिलाफ याचिका दाखिल
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में टीडीएस प्रणाली को मनमाना और तर्कहीन बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की गई है। इसे समानता समेत विभिन्न मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। जनहित याचिका में आयकर अधिनियम के तहत स्रोत पर कर कटौती या टीडीएस ढांचे को चुनौती दी गई है, जो भुगतानकर्ता की ओर से भुगतान के समय कर की कटौती और आयकर विभाग के पास जमा करने को अनिवार्य बनाता है।

कटौती की गई राशि को भुगतानकर्ता की कर देयता के विरुद्ध समायोजित किया जाता है। वकील अश्विनी उपाध्याय ने अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में केंद्र, विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधि आयोग और नीति आयोग को पक्ष बनाया है। इसमें टीडीएस प्रणाली को स्पष्ट रूप से मनमाना, तर्कहीन और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (पेशा करने का अधिकार) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के विरुद्ध घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में नीति आयोग को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने तथा टीडीएस प्रणाली में आवश्यक बदलाव का सुझाव देने के निर्देश देने की भी मांग की गई। इसमें कहा गया कि विधि आयोग को टीडीएस प्रणाली की वैधानिकता की जांच करनी चाहिए और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें