कोरोना वायरस की जांच के लिए बच्चे का सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच डेल्टा प्लस वैरिएंट धीरे-धीरे देश में फैल रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के निदेशक (आईजीआईबी) ने शुक्रवार को कहा कि डेल्टा प्लस या एवाई.1 वैरिएंट हमेशा चिंता की वजह (वैरिएंट ऑफ कंसर्न या वीओसी) रहेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि यह डेल्टा वैरिएंट (बी.1.617.2) से परिवर्तित हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट से तीसरी लहर आने के अभी कोई सुबूत नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने (डब्ल्यूएचओ) ने डेल्टा वैरिएंट को वीओसी करार दिया है और कहा है कि यह अल्फा वैरिएंट से कही अधिक ताकतवर है। हाल ही में केंद्र सरकार ने भी डेल्टा प्लस को वीओसी का टैग दिया है। आठ से अधिक राज्यों में 40 से अधिक डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित मरीज मिल चुके हैं।
अग्रवाल ने कहा कि महाराष्ट्र में इस माह 3500 से अधिक सैंपल लिए गए हैं। इनमें पाया गया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट बहुत ज्यादा है लेकिन अब भी यह एक फीसदी से कम ही है।
उन्होंने कहा कि यह डेल्टा की तरह ही है। यदि डेल्टा वैरिएंट ऑफ कंसर्न है तो डेल्टा प्लस भी ऐसा है। डेल्टा प्लस डेल्टा से परिवर्तित वैरिएंट है। मौजूदा वैरिएंट संक्रमित करने के लिए महत्वपूर्ण कारक नहीं हो सकता है लेकिन यह इम्यून और एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को लेकर अहम साबित हो सकता है। हमें नए म्यूटेशन के संक्रामक प्रसार में बदलाव की उम्मीद नहीं है।
हालांकि उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर पर सतर्कता को कम न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हमें इस बात की चिंता होनी चाहिए कि दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है।