प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'यमुना की सफाई' पर काम शुरू हो गया है। दिल्ली सरकार के 14 प्रमुख विभागों ने एक बैठक कर यमुना की सफाई करने का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। इस पर समयबद्ध तरीके से काम होगा और यमुना को साफ करने का काम किया जाएगा। यमुना की सफाई में नमामि गंगे योजना की हरिद्वार से लेकर वाराणसी तक में सफलतापूर्वक चलाई जा चुकी योजनाओं को एक मॉडल के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। इसी तर्ज पर यमुना का प्रदूषण दूर करने की कोशिश की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के इन सभी 14 विभागों (दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए, सिंचाई विभाग, नगर निगम और पर्यावरण विभाग इत्यादि) की नमामि गंगे योजना के अधिकारियों के साथ भारत मंडपम में एक बैठक हुई है जिसमें यमुना की सफाई के तमाम उपायों पर चर्चा की गई है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने ‘अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान’ (यूआरएमपी) के जरिए यमुना के प्रदूषण में बड़ा बदलाव लाने की योजना तैयार की है।
मोदी ने ली थी बैठक
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 अप्रैल 2024 को यमुना की सफाई पर शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी। इसमें उन्होंने यमुना की सफाई पर सभी विभागों को आपसी समन्वय कर यमुना को साफ करने का एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया था। पीएम के उसी निर्देश पर दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों और केंद्रीय पदाधिकारियों ने एक बैठक कर यमुना की सफाई का प्लान तैयार किया है।
यमुना सफाई योजना से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि यमुना की सफाई का एक्शन प्लान राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) के द्वारा तैयार किए गए यूआरएमपी डॉक्युमेंट के आधार पर किया जाएगा। यह केवल एक योजना पत्र नहीं है, बल्कि शहरी नदियों की सेहत के लिए एक ‘विजयी ब्लूप्रिंट’ है। इसके अंतर्गत पहले ही देश की सबसे प्रमुख नदी गंगा की सफाई की जा चुकी है। अब इसी योजना के अंतर्गत यमुना को साफ किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, यमुना की सफाई में केवल जल की गुणवत्ता को सुधारने का लक्ष्य ही नहीं निर्धारित किया गया है, बल्कि यमुना के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने पर काम किया जाएगा। इसमें यमुना के बहाव और बाढ़ क्षेत्र में रहने वाले जीवों और वनस्पतियों को भी संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके आसपास के क्षेत्रों में ऐसे वृक्षों से हरियाली पैदा करने की कोशिश की जाएगी जो यहां की मिट्टी के अनुसार सर्वाधिक उपयुक्त होंगे। यानी वृक्षारोपण में स्थानीय पौधों को वरीयता दी जाएगी।
फिर दिल्ली की लाइफ लाइन बनेगी यमुना
यमुना हमेशा से दिल्ली की लाइफ लाइन रही है। इसके आसपास ही दिल्ली का विकास हुआ है। लेकिन वर्तमान प्रदूषण के कारण यमुना का महत्त्व घट गया है। इसका पानी पीने योग्य ही नहीं, कृषि कार्यों के लायक भी नहीं रह गया है। लेकिन अब यमुना पुनर्जीवन एक्शन प्लान में यमुना के प्रदूषण को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
जनभागीदारी महत्त्वपूर्ण
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने एक कार्यक्रम में कहा है कि यमुना को साफ करने का कार्य दिल्ली की जनता की भागीदारी के बिना नहीं हो सकता। लोगों को यमुना को साफ रखने से उनके जीवन पर पड़ने वाले असर के प्रति सचेत किया जाएगा। उनकी सामाजिक जिम्मेदारी को यमुना के साथ हिस्सेदार बनाते हुए इसे साफ करने की योजना पर काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यमुना को शीघ्र ही दुबारा दिल्ली की लाइफ लाइन बनाया जाएगा। सभी प्रमुख एजेंसियां अब ‘वन टीम, वन मिशन’ के अंतर्गत एक साथ आकर यमुना को साफ करने के काम में जुट गई हैं। माना जा रहा है कि सभी एजेंसियों के सहयोग से जल्द ही यमुना सफाई पर गुणात्मक कार्य दिखाई देगा।