फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली को धूल की घुटन भरी परत से बचायेगी 31 लाख देसी पेड़ों की दीवार

Mon, 09 Jul 2018 10:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

राजस्थान से आने वाली रेतीली धूल से राजधानी दिल्ली को बचाने के लिए करीब 31 लाख पेड़ों की दीवार से घेरा जाएगा। बता दें कि जून में राजस्थान की ओर से आई धूलभरी हवाओं के चलते दिल्ली में औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स सीवियर कैटेगरी में यानी करीब 431 दर्ज किया गया था। यह अभी तक का सबसे ज्यादा औसत था। पिछले दिनों राजस्थान की आंधी के कारण दिल्ली के ऊपर छायी धूल की परत की समस्या से निजात दिलाने के लिए केन्द्र और दिल्ली सरकार की एजेंसियों ने 50 किस्म के देसी पेड़ों की दीवार से राजधानी की तीन ओर से घेराबंदी शुरु कर दी है। इसमें यमुना तट और अरावली वन क्षेत्र को घेरते हुये दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सीमा तक लगभग 31 लाख पेड़ों से नैसर्गिक अवरोधक (नेचुरल बैरियर) बनाया जायेगा।

विज्ञापन


केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस योजना के दो मकसद हैं। पहला मकसद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायुप्रदूषण के लिये जिम्मेदार पार्टिकुलेट तत्वों (पीएम 2.5 और पीएम 10) को देसी पेड़ों द्वारा अवशोषित करना और दूसरा मकसद हर साल पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान में आने वाली आंधी से जनित धूल के गुबार की दमघोंटू परत से दिल्ली को बचाना है।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित इस योजना में नेचुरल बैरियर के लिये पर्याप्त घने और अधिक ऊंचाई वाले पिलखन, गूलर, आम और महुआ सहित देसी पेड़ों को चुना गया है। ये वृक्ष वायुमंडल में हवा के कम दबाव के क्षेत्र के कारण अतिसूक्ष्म धूलकणों को ऊपर उठने से रोकते हैं। साथ ही धूलभरी आंधी में उड़कर आने वाले धूलकणों को भी ये पेड़ जमीन से कुछ मीटर की ऊंचाई पर संघनित होने से रोकते हैं। इसके अलावा पीपल, नीम, बरगद, बेर, आंवला, जामुन, अमलताश, हर्र और बहेड़ा सहित अन्य प्रजातियों के ऐसे वृक्ष भी इसमें शामिल हैं जो सामान्य से अधिक मात्रा में ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इनमें 24 घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले पीपल के सर्वाधिक पेड़ लगाये जायेंगे।
विज्ञापन

 

विज्ञापन

आगामी 15 जुलाई से 15 सितंबर तक वन महोत्सव के दौरान चलेगा सघन वृक्षारोपण अभियान

विभाग के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि धूल और हवा में घुले सूक्ष्म दूषित तत्व, साल भर हरे भरे रहने वाले स्थानीय पेड़ों की पत्तियों पर आसानी से जमा हो जाते हैं। पत्तियों पर जमा दूषित तत्व बारिश होने पर मिट्टी में समा जाते हैं। इसलिये यह तरीका दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने में कारगर और स्थायी समाधान साबित हो सकता है।

इस परियोजना को दिल्ली सरकार का वन विभाग दो साल के भीतर अंजाम देगा। दिल्ली वन संरक्षक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सात जुलाई से इस योजना की औपचारिक शुरुआत हो गयी है। उन्होंने बताया कि स्थानीय परिस्थितियों में जल्द पनपने की प्रवृत्ति वाले देसी पेड़ दिल्ली के मौलिक पर्यावास को भी बहाल करेंगे।
 
इसके तहत केन्द्रीय एजेंसी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), दिल्ली मेट्रो, उत्तर रेलवे और दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और नयी दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) सहित तीनों नगर निगम (एमसीडी) अपने क्षेत्राधिकार वाले इलाकों में ये पेड़ लगायेंगे। उन्होंने बताया कि सभी एजेंसियां बारिश के मौसम में आगामी 15 जुलाई से 15 सितंबर तक वन महोत्सव के दौरान सघन वृक्षारोपण अभियान चलायेंगी।

इनमें 21 लाख देसी पेड़ और दस लाख झाड़ीनुमा पेड़ (कनेर, गुड़हल, बहुनिया और चांदनी आदि) लगाये जायेंगे। इनमें 4.22 लाख पेड़ वन विभाग, चार लाख पेड़ तीनों एमसीडी, तीन लाख पेड़ एनडीएमसी, 35 हजार पेड़ सीपीडब्ल्यूडी और 8.75 लाख पेड़ डीडीए लगायेगा। सभी एजेंसियां दो साल तक इनका सघन पोषण करेंगी। इसके बाद इनकी सामान्य निगरानी करते हुये स्वतंत्र एजेंसी से पेड़ों के विकास की लेखा परीक्षा (सर्वाइवल ऑडिट) करायी जायेगी। इसका मकसद पेड़ों के जीवित बचने की जांच करना है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें