विभाग के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि धूल और हवा में घुले सूक्ष्म दूषित तत्व, साल भर हरे भरे रहने वाले स्थानीय पेड़ों की पत्तियों पर आसानी से जमा हो जाते हैं। पत्तियों पर जमा दूषित तत्व बारिश होने पर मिट्टी में समा जाते हैं। इसलिये यह तरीका दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने में कारगर और स्थायी समाधान साबित हो सकता है।
इस परियोजना को दिल्ली सरकार का वन विभाग दो साल के भीतर अंजाम देगा। दिल्ली वन संरक्षक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सात जुलाई से इस योजना की औपचारिक शुरुआत हो गयी है। उन्होंने बताया कि स्थानीय परिस्थितियों में जल्द पनपने की प्रवृत्ति वाले देसी पेड़ दिल्ली के मौलिक पर्यावास को भी बहाल करेंगे।
इसके तहत केन्द्रीय एजेंसी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), दिल्ली मेट्रो, उत्तर रेलवे और दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और नयी दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) सहित तीनों नगर निगम (एमसीडी) अपने क्षेत्राधिकार वाले इलाकों में ये पेड़ लगायेंगे। उन्होंने बताया कि सभी एजेंसियां बारिश के मौसम में आगामी 15 जुलाई से 15 सितंबर तक वन महोत्सव के दौरान सघन वृक्षारोपण अभियान चलायेंगी।
इनमें 21 लाख देसी पेड़ और दस लाख झाड़ीनुमा पेड़ (कनेर, गुड़हल, बहुनिया और चांदनी आदि) लगाये जायेंगे। इनमें 4.22 लाख पेड़ वन विभाग, चार लाख पेड़ तीनों एमसीडी, तीन लाख पेड़ एनडीएमसी, 35 हजार पेड़ सीपीडब्ल्यूडी और 8.75 लाख पेड़ डीडीए लगायेगा। सभी एजेंसियां दो साल तक इनका सघन पोषण करेंगी। इसके बाद इनकी सामान्य निगरानी करते हुये स्वतंत्र एजेंसी से पेड़ों के विकास की लेखा परीक्षा (सर्वाइवल ऑडिट) करायी जायेगी। इसका मकसद पेड़ों के जीवित बचने की जांच करना है।