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सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के दिशा-निर्देशों को नहीं पहचानती दिल्ली ट्रैफिक पुलिस

Sun, 09 Sep 2018 12:09 AM IST
Riya Kumari जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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traffic police
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सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा कमेटी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को दिल्ली ट्रैफिक पुलिस नहीं पहचानती। ये निर्देश कैसे, क्यों और किसने दिए हैं, इससे ट्रैफिक पुलिस को कोई लेना-देना नही है। खास बात यह है कि ई-चालान मशीन से जो स्लिप बाहर निकलती है, उस पर साफ शब्दों में लिखा है कि यह चालान उल्लंघनकर्ता की काउंसलिंग करने के बाद ही जारी किया गया है। 
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यहां पर हैरानी की बात तो ये है कि खुद ट्रैफिक पुलिसकर्मी यह नहीं जानते हैं कि जिस गाड़ी का चालान कटा है, उसके चालक की काउंसलिंग भी करनी है। इतना ही नहीं, चालान करने वाले पुलिस कर्मियों को तो यह भी नहीं मालूम कि काउंसलिंग करने की बात कहां पर लिखी है।

बता दें कि समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट और उसकी सड़क सुरक्षा समिति यातायात उल्लंघन को लेकर वाहन चालकों की अधिक से अधिक काउंसलिंग करने पर जोर देती रही है। सड़क सुरक्षा कमेटी ने इस बाबत सभी राज्यों को दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि सभी नहीं, तो कम से कम कुछ मामलों में तो वाहन चालकों की काउंसलिंग बहुत जरूरी है।
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खासतौर से बिना हेलमेट वाहन चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, ड्रंकन ड्राइविंग, ओवरस्पीड, लालबत्ती का उल्लंघन, मोबाइल फोन पर बात करना या मालवाहक गाड़ियों में सवारी बैठाना आदि। ट्रैफिक पुलिस को इस बाबत अवगत करा दिया गया था। इतना ही नहीं, ट्रैफिक कर्मियों को यह बात सदैव याद रहे कि यातायात उल्लंघनकर्ताओं की काउंसलिंग भी करनी है, इसलिए उसे चालान स्लिप पर भी अंकित कर दिया गया। ई-चालान मशीन से जो भी चालान होता है और उससे बाहर निकली हर स्लिप पर साफ लिखा है कि यह चालान काउंसलिंग करने के बाद ही जारी किया गया है।  

हम नही जानते कि काउंसलिंग क्या होती है ट्रैफिक पुलिस बोली 

अमर उजाला डॉट कॉम ने जब इस मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि ट्रैफिक पुलिस केवल चालान काटने तक ही सीमित है। उसे नहीं मालूम कि काउंसलिंग भी करनी होती है। डब्लू प्वाइंट पर शुक्रवार रात ट्रैफिक पुलिस ने बिना हेलमेट का चालान किया। इसमें हमारी टीम के सदस्य शामिल थे। ट्रैफिक पुलिस ने कहा, आप सौ रुपये दो और जाओ। अन्य कोई बात नही होगी। इसी तरह शनिवार को मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, केजी मार्ग और इंडिया गेट पर खड़े ट्रैफिक पुलिस कर्मियों से जब इस बाबत पूछा तो उन्होंने कहा, हमें नहीं मालूम कि काउंसलिंग भी करनी होती है। 

सीपी के बाहरी सर्कल से जब बाराखंबा रोड पर चलते हैं तो वहां खड़े ट्रैफिक पुलिस कर्मियों से शाम पांच बजे इसी सिलसिले में बातचीत की गई। पहले तो वे बहस करने लगे कि ऐसा कोई नियम ही नहीं है। उन्होंने हम से कहा, आप दिखाओ कहां लिखा है। हमने कहा, आप किसी भी चालान की प्रति निकाल लें और देखें कि उस पर क्या लिखा है। पांच मिनट बाद पुलिस कर्मियों के दिमाग में भी घोड़े दौड़ने लगे। उन्होंने हमारे सामने ही चालान स्लिप निकाली तो वे भी हैरान रह गए। चालान स्लिप पर लिखा था कि यह चालान काउंसलिंग करने के बाद ही जारी किया गया है। चूंकि अब पुलिस के पास कोई जवाब नहीं था, इसलिए हम भी वहां से निकल लिए।  

क्या कहा ट्रैफिक पुलिस के ज्वाइंट सीपी ने

संयुक्त पुलिस आयुक्त ट्रैफिक आलोक कुमार का कहना है कि यह बात सही है कि ऑन स्पॉट चालान वाले उल्लंघनकर्ता की काउंसलिंग नहीं हो पा रही है। हालांकि जो भी ड्राइवर चालान भरने के लिए ट्रैफिक पुलिस के मुख्यालय टोडापुर आता है तो उसकी काउंसलिंग कराई जाती है। बाकायदा काउंसलिंग के दो सत्र चलते हैं। अब सोमवार से ये आदेश जारी कर दिए जाएंगे कि जहां कहीं भी चालान हो, वहीं पर उल्लंघनकर्ता की काउंसलिंग कराई जाए।

पिछले साल बम्पर चालान और बम्पर राजस्व 

दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस द्वारा पिछले साल 6010772 वाहनों का चालान किया गया था। इससे सरकार को करीब 94 करोड़ रुपये का राजस्व भी मिला है। बता दे कि दिल्ली में अभी तक चालान का यह सबसे बड़ा आंकडा है। इससे पहले ट्रैफिक उल्लंघन में 2016 के दौरान 4084838, साल 2015 में 3492100 और साल 2014 में 4367793 चालान काटे गए थे। 

गत वर्ष 1584 लोग और साल 2016 में 1591 लोग सड़क हादसों में मारे गए थे। 2017 में करीब दस लाख चालान बिना हेलमेट वाले दुपहिया वाहन चालकों के हुए थे, जबकि पीछे बैठे लोग, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था, ऐसे चालान की संख्या 4.73 लाख थी। 
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