सर्जिकल स्ट्राइक के जरिये दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे जवानों की बहादुरी को पूरा देश सलाम करता है, लेकिन दुश्मनों की गोली खाने के बाद अपने सामान्य जीवन से दूर होने वाले यही जवान देश के सबसे बड़े दिल्ली स्थित सैन्य अस्पताल के डॉक्टरों को सलाम कर रहे हैं।
इसकी वजह है वर्षों से अंधकार और दिव्यांगता में जी रहे इन जवानों को नया जीवन मिलना। डॉक्टरों ने कृत्रिम (आर्टिफिशियल) पद्घति के जरिये किसी को आंख दी, तो किसी को कान। इस साल 67 जवानों को कृत्रिम आंख, कान और नाक देकर डॉक्टरों ने सैन्य जवानों का हौसला और भी ज्यादा बुलंद कर दिया है।
दिल्ली के धौला कुआं स्थित आर्मी अस्पताल यूं तो कई तरह के चिकित्सीय शोध और इलाज के लिए चर्चित है, लेकिन यहां के दंत केंद्र ने भी जवानों को कृत्रिम अंग देकर नया मुकाम हासिल किया है। इस केंद्र में 5 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम है, जो सीमा पर दिव्यांग हुए जवानों का उपचार करने में जुटी है।
34 साल बाद अंधेरे से निकले लेफ्टिनेंट कर्नल
वर्ष 1983 में कश्मीर बॉर्डर पर एक बम धमाके में अपनी आंख गंवा बैठे लेफ्टिनेंट कर्नल यशपाल जगिया 34 साल बाद अंधेरे से वापस आ गए हैं। धमाके में उनकी दाईं आंख चली गई थी। डॉक्टरों ने मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के जरिये कृत्रिम आंख लगाई है। अमर उजाला से बातचीत के दौरान यशपाल की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि मैं अपनी खुशी का इजहार नहीं कर पा रहा हूं। ये मेरे लिए भगवान के किसी चमत्कार से कम नहीं है।
कान से घुसी गोली मुंह से निकली
वर्ष 2012 में श्रीनगर के तंगधार चौकी पर दुश्मनों से गोलीबारी के दौरान नायक सुशील कुमार बुरी तरह से जख्मी हो गए। गोली उनके कान में घुसते हुए सीधे मुंह के रास्ते बाहर निकल गई, जिसकी वजह से सुशील बहरे होने के अलावा बोल भी नहीं पा रहे थे।
उनके मुंह में ऊपरी तालू पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। वे बताते हैं कि कुछ समय बाद अपनी हालत को देखकर उनका मन काफी टूट गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। पांच सर्जरी के बाद फिलहाल सुशील ठीक से बोलना शुरू कर चुके हैं।
अब तक 250 सर्जरी, देश में कहीं नहीं
प्रोस्थोडोन्टिक्स विभागाध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. विश्वनाथन मंडपाराम्बिल ने अमर उजाला को बताया कि इस साल 67 जवानों को कृत्रिम अंग कान, नाक और आंख के अलावा अन्य अंग दिए गए हैं। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में 250 मैक्सिलोफेशियल सर्जरी भी की जा चुकी हैं। यहां जैसी सुविधाएं देश के अन्य किसी भी सैन्य अस्पताल में नहीं हैं।
हर केस चुनौतियों से भरा
सीमा पर लड़ाई के दौरान हमारे जवान जब घायल होकर यहां आते हैं, तो एक-एक केस हमारे लिए चुनौतियों से भरा होता है। दिल्ली का सैन्य अस्पताल अपने जवानों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा दे रहा है। जल्द ही यहां 3डी प्रिंटर्स और स्कैनिंग के जरिये भी इलाज होगा।