दिल्ली में सोमवार को ऑक्सीजन की मांग 976 मीट्रिक टन थी, लेकिन केंद्र सरकार से उसे केवल 433 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल पाई। यह मांग की आधी से भी कम यानी केवल 44 फीसदी थी। ऑक्सीजन की यह सप्लाई उस 490 मीट्रिक टन की मात्रा से भी कम है जितनी कि स्वयं केंद्र ने दिल्ली के लिए तय कर रखी है।
बीते एक सप्ताह में दिल्ली को कुल मांग के मुकाबले औसतन 40 फीसद ही ऑक्सीजन मिली है। अभी भी मांग व आपूर्ति में 56 फीसद का अंतर है। अगर ऑक्सीजन की सप्लाई की स्थिति यह है तो यहां के मरीजों की जान कैसे बचाई जा सकेगी? यही सवाल हाईकोर्ट ने भी केंद्र से पूछा। कोर्ट ने इसे भयंकर लापरवाही करार दिया।
उल्लेखनीय है कि कि सोमवार को भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के 41 अस्पतालों ने प्रदेश सरकार के सामने ऑक्सीजन के लिए डिस्ट्रेस कॉल की थी। दिल्ली सरकार ने इन अस्पतालों को 21.3 मीट्रिक टन ऑक्सीजन पहुंचाई। दिल्ली की सरकार एक डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित कर ऑक्सीजन की सप्लाई पर पूरी निगाह रख रही है।