फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जंतर-मंतर की जगह अब कहां होंगे प्रदर्शन: रामलीला मैदान से बुराड़ी तक कितनी लगेगी फीस; क्या आसान होगी बुकिंग?

Tue, 13 Oct 2026 06:34 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जंतर-मंतर की जगह अब रामलीला मैदान, सीबीडी ग्राउंड और बुराड़ी जैसे स्थलों पर प्रदर्शन-आयोजन करने होंगे। इन जगहों पर बुकिंग, शुल्क और सालभर होने वाले दूसरे कार्यक्रमों के कारण प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। रामलीला मैदान में प्रदर्शन के लिए कितनी रकम देनी होगी और जंतर-मंतर ने देश के बड़े आंदोलनों में क्या भूमिका निभाई? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
विज्ञापन
नए आयोजन स्थलों पर एक बार में एक ही संगठन कर सकेगा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जंतर-मंतर सिर्फ प्रदर्शनों के लिए ही था। इसमें एक साथ कई संगठन प्रदर्शन कर सकते थे। संसद सत्र चलने के दौरान देश भर से बड़ी संख्या में संगठन यहां पहुंचते थे। जबकि तीनों नए प्रदर्शन स्थलों पर साल भर अलग-अलग तरह के सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
विज्ञापन


ऐसे में बुकिंग करवाना आसान नहीं होगा। मसलन, 29-30 दिसंबर के बीच ही रामलीला मैदान की बुकिंग हो सकती है। जबकि सीबीडी ग्राउंड के बुकिंग का संभावना रामलीला के आयोजन से दशहरा बाद ही बनती है। बुराड़ी में भी इसी तरह आयोजन चलते रहते हैं। वहीं, रामलीला मैदान की बुकिंग का एक दिन का चार्ज 50,000 रुपये है।

वहीं, 55,000 रुपये सुरक्षा राशि जमा करनी होती है। टैक्स आदि मिलाकर शुरुआती खर्च 1.21 लाख रुपये बैठता है। सुरक्षा राशि वापस कर दी जाती है। हालांकि, अधिकतम 150 लोगों के साथ छोटा सा हिस्सा प्रदर्शन के लिए मिल सकता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: 'भारत पर अमेरिका का भरोसा, हर क्षेत्र में बढ़ा रहे सहयोग'; राजदूत सर्जियो गोर ने क्या-क्या कहा?

दूसरी तरफ सीबीडी ग्राउंड में शादियों सरीखे आयोजन एक लाख से तीन लाख के बीच में होते हैं। बुराड़ी ग्राउंड का चार्ज तीन हजार से पांच हजार प्रति एकड़ के बीच होता है।
विज्ञापन


21वीं सदी में बड़े आंदोलनों का गवाह रहा जंतर-मंतर
  • 2011 में अन्ना हजारे के जन लोकपाल आंदोलन ने इसे देशभर में पहचान दिलाई। पांच अप्रैल को शुरू हुए उनके अनशन ने जन लोकपाल विधेयक की मांग को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाज में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
  • 2012 में दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म और बाद में उसकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। निर्भया के नाम से पहचानी जाने वाली उस युवती के लिए न्याय की मांग करते हुए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
  • 2017 में तमिलनाडु के किसान अपनी समस्याएं लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने 41 दिन तक धरना दिया। . 2023 में पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरना देकर कार्रवाई की मांग की।
  • जून-जुलाई में सीजेपी के दौरान जेन जी और छात्र संगठनों ने शिक्षा से लेकर चुनाव व्यवस्था तक के मुद्दे उठाए। प्रदर्शन में जंतर-मंतर नई पीढ़ी के लिए भी अपनी बात रखने का अहम मंच बना हुआ है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें