दिल्ली की आबोहवा जहरीली बनी हुई है। दीपावली से पहले शुरू हुआ प्रदूषण का स्तर अब और खतरनाक हो चला है। शुक्रवार को एयर क्वॉलिटी इंडेक्स तय मानक से 11 गुना ऊपर 422 के स्तर तक गया है। वहीं मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगले तीन दिन में हालात थोड़े सामान्य हो सकते हैं, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अभी भी बना हुआ है।
कम है हवा की रफ्तार
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि हवा की कम रफ्तार और कम तापमान के चलते भी प्रदूषण सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। स्काईमेट मौसम सेवा के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने अमर उजाला को बताया कि अगले दो-तीन दिन तक प्रदूषण से निजात नहीं मिलने वाली है। उनका कहना है कि चूंकि हवा में तेजी नहीं है, इसलिए अगले दो दिन तक स्तर खतरनाक ही रहेगा। दिवाली से दो दिन पहले तेज हवा से प्रदूषण के स्तर में कमी आई थी। उन्होंने बताया कि तापमान कम होने से धुंध छा रही है, जिससे प्रदूषण के कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं।
क्यों बनते हैं अक्तूबर-नवंबर में ऐसे हालात
स्काईमेट के मुख्य मौसम विज्ञानी पलावत मानते हैं कि यह स्थिति पहली बार नहीं आई है, इस मौसम में हर साल ऐसे हालात पैदा होते हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर के आखिर और नवंबर में पंजाब-हरियाणा में पराली जलाई जाती है, और उस दौरान उत्तर-पश्चिमी हवा चलती है, साथ ही मौसम बदलने से उस दौरान तापमान में गिरावट आती है। अगर इस दौरान हवा की रफ्तार कम जाए, तो स्थानीय प्रदूषण पराली के धुएं के साथ मिल कर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के गंभीर हालात पैदा कर देता है।
13 नवंबर से वेस्टर्न डिस्टरबेंस
पलावत के मुताबिक अगले दो दिन बाद यानी 11 तारीख से हवा की रफ्तार में तेजी आएगी, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। उन्होंने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते पहाड़ी राज्यों के ऊपर इलाकों में बर्फबारी हो सकती है। वहीं 13 तारीख से फिर वेस्टर्न डिस्टरबेंस दस्तक दे रहा है, लेकिन उसका प्रभाव पड़ने में वक्त लगेगा।
अगले तीन दिन के हालात
मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को हवा हवा की रफ्तार 15 किमी प्रतिघंटा से 30 किमी प्रतिघंटा होती है कि तो प्रदूषण में कमी आएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को हवा की रफ्तार 29 किमी प्रति घंटा तक रहेगी। वहीं मंगलवार को हवा की रफ्तार 35 किमी प्रति घंटा रहने की उम्मीद है।
शुक्रवार के हालात
शुक्रवार 9 नवंबर को देश की राजधानी का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स खतरनाक श्रेणी को पार करते हुए 422 के स्तर तक पहुंच गया। भू विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले सफर (सिस्टम ऑफ एयर क्वॉलिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) के डाटा के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में एयरपोर्ट, मथुरा रोड, पूसा, पीतमपुरा, दिल्ली यूनिवर्सिटी, आयानगर, चांदनी चौक, गुड़गांव और नोएडा में पीएम 2.5 का स्तर 450 से ऊपर रहा, वहीं पीएम 10 का स्तर भी 344 से लेकर 460 पर बना रहा। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स के मुताबिक 0 से 50 का स्तर अच्छा, 51 से 100 का स्तर संतोषजनक, 101 से 200 का स्तर मध्यम, 201 से 300 तक खराब और 301 से 400 तक बेहद खराब और 401 से 500 तक बेहद खतरनाक माना जाता है।
डीजल कारें नहीं चलाने की अपील
गौरतलब है कि अर्बन एमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद दिल्ली में इस साल 50 लाख किलोग्राम से ज्यादा के पटाखे जलाए गए। वहीं पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए डीजल गाड़ियां रखने वाले निजी वाहन मालिकों से 10 नवंबर तक उपयोग नहीं करने की अपील की है।