अदालत में वकीलों ने हड़ताल कर दी है और वे किसी को अंदर नहीं घुसने दे रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस छोटे मोटे मामलों में अपराधियों को पकड़ने से बच रही है। अगर पुलिस किसी अपराधी को पकड़ती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना पड़ता है। बता दें कि दिल्ली की जिला अदालतों में सोमवार से लेकर अभी तक पुलिस को घुसने नहीं दिया जा रहा है।
इस मामले में छह पुलिस अधिकारियों, जिनमें चार थानाध्यक्ष, एक एसीपी और एक डीसीपी हैं, से बातचीत की गई है। इन सभी का कहना है कि पिछले तीन दिन से जो हालात बन रहे हैं, उनमें केवल बड़े मामलों में ही गिरफ्तारी की जा रही है। जिन मामलों की तफतीश चल रही है, उनमें अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। इसी तरह अपराध की छोटी घटनाएं जैसे स्नेचिंग, मारपीट, चोरी, आर्थिक अपराध, साइबर क्राइम और घरेलू हिंसा आदि मामलों में पुलिस गिरफ्तारी की ओर नहीं जा रही।
यहां तक कि स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच भी छोटे अपराधियों पर अपना ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है। स्पेशल सेल ने तीन नवंबर को आखिरी गिरफ्तारी की थी। यह गिरफ्तारी लूट के एक मामले में की गई थी।
दिल्ली पुलिस की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली के विभिन्न जिलों में 186 थाने हैं। इनमें पांच नवंबर को 96 अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं। पश्चिमी दिल्ली से नौ, दक्षिण पूर्व से चार, दक्षिण पश्चिम में दो, दक्षिण दिल्ली से चार, शाहदरा से चार, बाहरी दिल्ली से 10, उत्तर पश्चिम से एक, उत्तर पूर्व जिले से 53, उत्तरी जिले से तीन, एयरपोर्ट से दो, पूर्वी दिल्ली से तीन, मध्य जिला, नई दिल्ली और उत्तर बाहरी में कोई भी अपराधी गिरफ्तार नहीं हुआ।