दिल्ली के लोगों को आजकल एक विशेष तरह के फोन कॉल आ रहे हैं। फोन रिसीव करने पर दूसरी तरफ से एक लड़की की आवाज आती है जो लोगों को बताती है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है। लेकिन उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अरविंद केजरीवाल लोगों के नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने का काम कर रहे हैं।
इसके बाद बातचीत की प्रक्रिया शुरू होती है और फोन करने वाली लड़की लोगों से पूछती है कि अगले लोकसभा चुनाव में वो किसे वोट देंगे। 'हां' और 'नहीं' में इस सवाल का जवाब भी पूछा जाता है कि क्या वे आम आदमी पार्टी के कामकाज से संतुष्ट हैं? और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच वे किसे ज्यादा अच्छा समझते हैं?
दरअसल, इसे आम आदमी पार्टी का अपने चुनाव प्रचार का एक नया तरीका माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी पिछले कई महीनों से इस मुद्दे को उठाये हुए है कि दिल्ली के लगभग तीस लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। पार्टी का आरोप है कि ऐसा भाजपा की साजिश के तहत किया जा रहा है।
पार्टी ने व्यापारी और एक वर्ग विशेष के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटने की बात भी कही थी। एनआरसी पर भाजपा के स्टैंड ने इस बात को स्थापित करने का ही प्रयास किया था। खुद भाजपा ने दिल्ली विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था और दिल्ली से 'अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों' को देश से बाहर किये जाने की मांग की थी।
वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे एक वर्ग विशेष के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध किया था। पार्टी के नेताओं मनीष सिसोदिया, गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज और राघव चड्ढा ने इस पर प्रेस कांफ्रेंस कर इसे गरमाने का प्रयास किया था।
आम आदमी पार्टी का तर्क
आप नेता अक्षय मराठे ने कहा कि वोटर लिस्ट में नाम काटने की शिकायत पार्टी के पास लोगों की तरफ से ही आई थी। इसके बाद उसने इसे चुनावी मुद्दा बनाया। दूसरी बात, किसी का नाम काटने के पहले उसे ये सूचना दी जानी चाहिए लेकिन चुनाव आयोग की प्रक्रिया में लोगों से कुछ नहीं पूछा जाता है।
उन्होंने कहा कि जहां तक लोगों की राय जानने के लिए फोन करने की बात है, हम हमेशा जनता से पूछकर ही कोई काम करते हैं। ऐसे में लोगों से केजरीवाल के काम के बारे में पूछना हमारी जनता की नब्ज जानने की कोशिश है जो हमारे लोकतंत्र में विश्वास का सबूत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हमारे लिए दिल्ली के लोगों की राय कितनी महत्वपूर्ण है।
भाजपा ने आप के प्रचार का नुस्खा बताया
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसे आम आदमी पार्टी की घटिया चुनाव प्रचार का तरीका बताया है। गुप्ता के मुताबिक़ वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या काटने का काम चुनाव आयोग का होता है। इसमें किसी राजनीतिक दल की कोई भागीदारी नहीं होती है।
आप के इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि वोटर लिस्ट में लोगों के नाम काटने का ये आंकड़ा बिलकुल गलत है। कुछ लोगों को उनके पते पर न पाए जाने पर उनका नाम अवश्य काटा जाता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति आयोग के कार्यालय जाकर अपना नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस साल कई लाख वोटरों की वृद्धि भी हुई है।