देश के अति पिछड़े इलाकों में रहने वाली महिलाओं को अब सरकार आर्थिक रूप से समृद्ध व आत्मनिर्भर बनाएगी। इसके लिए विभिन्न राज्यों में मुक्त कौशल केंद्रों की स्थापना की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की योजना के तहत राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) इस पहल का क्रियान्वयन करेगा।
इन केंद्रों के जरिये देश के विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्ग, मुख्यधारा से वंचित व आदिवासी समाज की महिलाओं को सर्वाधिक फायदा मिलेगा। केंद्रों में महिलाओं को निशुल्क वोकेशनल शिक्षा मिलेगी। योजना के तहत इसे प्राथमिक तौर पर देश में आठ जगहों पर खोला जाना है। इसमें से बांकुड़ा (पश्चिम बंगाल), कोडरमा (झारखंड), मेहसाणा (गुजरात), भुवनेश्वर (ओडिशा), कामरूप रूरल (असम), अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर), बस्तर (छत्तीसगढ़) व बंगलूरू (कर्नाटक) शामिल हैं, इसमें से ओडिशा, झारखंड व गुजरात में तीन केंद्र खुल चुके हैं।
गुजरात के मेहसाणा जिले में खुला पहला कौशल केंद्र
इसी क्रम में गुजरात के मेहसाणा जिला अंतर्गत कनभा गांव में मंगलवार को राज्य के पहले मुक्त कौशल केंद्र की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में एनआईओएस की अध्यक्ष, प्रोफेसर सरोज शर्मा ने कौशल केंद्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि प्राथमिक तौर पर जिले के लगभग 100 महिलाओं और लड़कियों को नि:शुल्क रोजगार कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कम साक्षरता दर वाले इलाकों का किया गया चयन
योजना के तहत ऐसे जिले व इलाके चुने गए हैं, जहां महिला शाक्षरता दर कम है। ऐसे में निरक्षर महिलाओं को पढ़ाने का प्रयास किया जाएगा और उनको जरूरी रोजगार कौशल सिखाया जाएगा। इसमें कंप्यूटर का आधारभूत ज्ञान, सिलाई, बुनाई व अन्य हस्तशिल्प कला, हथकरघा उत्पादों का प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण इस तरीके से दिया जाएगा कि प्रशिक्षित महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में अन्य साथियों व सहयोगियों को प्रशिक्षित कर सकें।