सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह 30 अक्तूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में उनकी नियमित जमानत याचिका पर विचार करेगी और उन्हें राहत देने से मना करने वाले हाईकोर्ट के तीन जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शराब कंपनी पेरनोड रिकार्ड के कार्यकारी बेनॉय बाबू को 25 सितंबर तक आत्मसमर्पण करने को कहा है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट से बाबू को दी गई अंतरिम जमानत को एक सप्ताह के लिए 19 सितंबर तक बढ़ा दिया।
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पीठ ने कहा कि वह 30 अक्तूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में उनकी नियमित जमानत याचिका पर विचार करेगी और उन्हें राहत देने से मना करने वाले हाईकोर्ट के तीन जुलाई के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा। पीठ के समक्ष बाबू के वकील हरीश साल्वे और मुकुल रोहगती ने बताया कि बाबू की पत्नी का 22 सितंबर को एक ऑपरेशन होना है। इसलिए उसे कुछ वक्त दिया जाए।
साल्वे ने कहा कि बाबू के पास योग्यता के आधार पर नियमित जमानत का अच्छा मामला है। उन्होंने अदालत से उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की। साल्वे ने कहा, वह 10 महीने से जेल में हैं और अब मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत पर बाहर हैं। चूंकि अदालत मामले की सुनवाई अक्तूबर के अंत में तय करने पर विचार कर रही है, इसलिए उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए। 10 दिनों में आसमान नहीं गिरेगा।
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इस पर पीठ ने कहा कि वह अंतरिम जमानत 25 सितंबर से आगे बढ़ाने की बिल्कुल भी इच्छुक नहीं है। बाबू को 25 सितंबर या उससे पहले आत्मसमर्पण करना होगा। पीठ ने आगे कहा, जहां तक नियमित जमानत की बात है ईडी को नोटिस जारी किया जाए जिसका जवाब चार सप्ताह में देना होगा। हम इस मामले में 30 अक्तूबर से शुरू होने वाले हफ्ते में सुनवाई करेंगे।