दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के गिरफ्तार न होने की संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं इसी बात की हो रही हैं कि सिसोदिया की गिरफ्तारी से चुनावी राज्यों में आम आदमी पार्टी को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। ऐसे में सिसोदिया की गिरफ्तारी पर फिलहाल अंकुश लगता हुआ दिख रहा है। हालांकि जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। जब तक कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं होते हैं तब तक गिरफ्तारी नहीं की जाती है।
राजनीतिक विश्लेषक एसएन झा कहते हैं कि मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी होगी, इसे लेकर थोड़ा संशय बना हुआ है। उनका कहना है कि जिस तरीके से सीबीआई की दबिश के बाद मनीष सिसोदिया गुजरात जाते हैं और वहां पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के शिक्षा मॉडल को लेकर बात करते हैं, उससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी किस तरीके से खुद को गुजरात में प्रोजेक्ट कर रही है। झा कहते हैं कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ दिल्ली शराब नीति के मामले में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ है। आम आदमी पार्टी इसे विदेश में छपी खबर की वजह से बदले की कार्रवाई बता रही है। वह कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल जब यह कहते हैं कि मनीष सिसोदिया को बेहतर शिक्षा मॉडल के लिए भारत रत्न मिलना चाहिए। उससे इस बात का अंदाजा हो जाता है कि आम आदमी पार्टी इस लड़ाई को किस स्तर पर जाकर लड़ रही है।
राजनीतिक विश्लेषक और कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले हिमांशु मिश्रा कहते हैं कि इस पूरे मामले में कुछ बातों को बहुत बारीक नजर से समझना होगा। वह कहते हैं कि एक तो सीबीआई की ओर से दर्ज किया गया मामला महत्वपूर्ण है। इस एफआईआर के बाद भाजपा के नेताओं की आक्रामकता दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है आम आदमी पार्टी के नेताओं का बचाव, जिसमें शराब नीति का कोई भी जिक्र ना होकर दिल्ली के शिक्षा मॉडल का जिक्र हो रहा है। हिमांशु कहते हैं कि इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की एफआईआर दर्ज होने के बाद जिस तरीके से लड़ाई दिल्ली की शराब नीति वर्सेस दिल्ली के शिक्षा मॉडल से हो रही है, उससे चुनावी राज्यों में माहौल बनने लगा है।
भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी जांच एजेंसी को करनी है। वह इस मामले में जांच कर रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी तो होना बिल्कुल तय है। और इस गिरफ्तारी का किसी भी तरीके से कोई राजनीतिकरण भी नहीं हो रहा है। भाजपा दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी कहते हैं कि मामला भ्रष्टाचार का है। ऐसे में मनीष सिसोदिया को जेल जाना ही पड़ेगा। तिवारी का कहते हैं कि एफआईआर तो शराब नीति में भ्रष्टाचार के लिए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री के ऊपर दर्ज हुई है। आम आदमी पार्टी दिल्ली के एजुकेशन मॉडल पर बात कर रही है। तिवारी का कहना है कि शिक्षा के मामले में भी भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें आ रही हैं। इसके अलावा मनोज तिवारी का कहना है कि दिल्ली के कई स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं हैं, उप प्रधानाचार्य नहीं हैं, शिक्षक नहीं है। बच्चों की कक्षाएं चल नहीं रही हैं। बच्चों की शिक्षा का स्तर इतना गिरा है कि बच्चों के फेल होने का प्रतिशत बढ़ गया है। वो कहते हैं कि इस पूरे मामले में तो राजनीति बिल्कुल नहीं हो रही है।
केंद्र की प्रमुख जांच एजेंसी से जुड़े रिटायर्ड अधिकारी ओपी माथुर कहते हैं कि जब तक आरोपी से पूछताछ में जांच एजेंसी को सहयोग मिलता रहेगा, तब तक गिरफ्तारी की संभावनाएं न के बराबर होती हैं। हां माथुर यह जरूर कहते हैं कि अगर इसी पूछताछ के दौरान जब भ्रष्टाचार के लगे आरोप साबित होने लगें तो गिरफ्तारी भी की जाती है। वे कहते हैं कि क्योंकि चुनाव आने वाले हैं और ऐसे दौर में यह सवाल तो उठना लाजमी है कि किस नेता की गिरफ्तारी से किस पार्टी को फायदा होगा और किस पार्टी को नुकसान। हालांकि उनका कहना है कि जांच एजेंसी जब मामला दर्ज करती है तो वह राजनीतिक नफा नुकसान देखकर काम नहीं करती है। राजनीतिक विश्लेषक एसएन झा फिलहाल ओपी माथुर की बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। झा का कहना है कि जांच एजेंसियां किस तरीके से काम करती हैं इसको लेकर फिलहाल कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है।