राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द करने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि रद्द करने को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं की विचारणीयता के मुद्दे पर जुलाई में सुनवाई करेगा।
इन दोनों एनजीओ की प्रमुख कांग्रेस नेता सोनिया गांधी हैं। केंद्र सरकार के वकील द्वारा एनजीओ के देखरेख का मुद्दा उठाए जाने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की।
केंद्र सरकार के वकील द्वारा पोषणीयता का मुद्दा उठाए जाने के बाद न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पिछले साल अक्तूबर में कानूनों के कथित उल्लंघन के लिए दो एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए थे। यह कार्रवाई 2020 में एमएचए द्वारा गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति द्वारा की गई जांच के बाद हुई थी।
एक अधिकारी ने पहले कहा था कि इन एनजीओ के खिलाफ जांच के बाद राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट (आरजीसीटी) के एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।
जांच में चीन सहित विदेशों से धन प्राप्त करते समय आयकर रिटर्न दाखिल करते समय दस्तावेजों में हेरफेर, धन का दुरुपयोग और धन शोधन शामिल था। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं।
आरजीएफ के ट्रस्टी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, सुमन दुबे और अशोक गांगुली हैं। आरजीसीटी के ट्रस्टी राहुल गांधी, अशोक गांगुली, बंसी मेहता और दीप जोशी हैं।
राजीव गांधी फाउंडेशन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द करने पर केंद्र को नोटिस
हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पंजीकरण को रद्द करने के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
याची ने सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दोनों एनजीओ का नेतृत्व कांग्रेस नेता सोनिया गांधी कर रहीं हैं। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के साथ-साथ राहुल और प्रियंका राजीव गांधी फाउंडेशन के ट्रस्टी हैं। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने सरकार को अपना जवाब 23 अगस्त तक दाखिल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नोटिस जारी करने में आठ सुनवाई हुई, क्योंकि सरकार ने कम से कम चार बार स्थगन मांगा था। यह मामला पहली बार जनवरी 2023 में अदालत के समक्ष आया था।
हालांकि, पीठ के न बैठने के कारण इसे कई बार स्थगित किया गया था। जब मामले को तीन फरवरी को सुनवाई के लिए लिया गया, तो सरकारी वकील की ओर से यह कहते हुए स्थगन की मांग की गई कि मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश होंगे।