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दिल्ली हाईकोर्ट: झूठे दावों को लेकर अधिकारियों में दंड का भय नहीं, अफसरों को जवाबदेह बनाए सरकार

Sat, 03 Jul 2021 04:27 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को अदालती मामलों में जवाबदेह बनाने के लिए केंद्र व दिल्ली की सरकार से कहा है कि वह नियम बनाएं। अदालती मामलों से निपटने में चूक करने वाले अफसरों पर कार्रवाई के नियम नहीं होने पर कोर्ट ने यह बात कही।
 
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दिल्ली हाईकोर्ट
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा झूठे दावे करने और उनका बचाव करने पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा कि दंड का भय नहीं होने से ऐसा करने वाले अधिकारियों की कोई जवाबदेही नहीं होती है। हाईकोर्ट ने केंद्र एवं दिल्ली सरकार से कहा कि वे अदालती मामलों से निपटने में चूक होने पर अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के मकसद से नियम बनाएं। 
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हाईकोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि उसका प्रथमदृष्टया यह मानना है कि जब भी सरकार कोई झूठा दावा करती है, तो इससे न्याय की मांग कर रहे वादी के साथ घोर अन्याय होता है। अदालत पर भी अनावश्यक दवाब पड़ता है। न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा ने 31 पन्नों के आदेश में कहा, 'इन सभी मामलों में सरकार ने इस अदालत के समक्ष झूठे दावे किए हैं, जो कि गहरी चिंता का विषय है।

इन सभी मामलों ने इस अदालत की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि सजा के डर के बिना इस प्रकार के झूठे दावे किए जा रहे हैं, क्योंकि झूठे दावे करने के लिए किसी सरकारी अधिकारी की कोई जवाबदेही नहीं होती और सरकार झूठे दावे करने वाले व्यक्ति के खिलाफ शायद ही कार्रवाई करती हैं।' हाईकोर्ट ने कहा कि इन झूठे दावों के कारण सरकार को भी नुकसान होता है, लेकिन झूठे दावे करने वाले संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
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उच्च न्यायालय ने कहा, 'यदि अदालत अधिकारियों के दिए तथ्यों को झूठा या गलत पाती है, तो सरकार को कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए और फैसले की प्रति अधिकारी की एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) फाइल में रखी जाए। इससे अदालती मामलों में अधिकारी के उठाए कदमों के लिए उसकी जवाबदेही सुनिश्चित होगी।'

सिक्किम के नियमों का जिक्र किया
अदालती मामलों से निपटने में चूक के लिए अपने अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने के उद्देश्य से सिक्किम के बनाए नियमों का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली सरकार को भी इसी तरह के नियमों को शामिल करना चाहिए।

हरियाणा ने बनाई मुकदमा नीति
अदालत ने कहा कि हरियाणा ने राज्य में मुकदमों को समझने, प्रबंधित करने और संचालित करने के तरीके में सुधार लाने के लिए हरियाणा राज्य मुकदमा नीति-2010 तैयार की है। उसने कहा कि अदालतों में लंबित मामलों और देरी की राष्ट्रीय चिंता को सक्रिय रूप से कम करने की आवश्यकता है।

अभी सरकार की कोई मुकदमा नीति नहीं
केंद्र सरकार के स्थायी वकील कीर्तिमान सिंह ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में सरकार की कोई मुकदमा नीति नहीं है और राष्ट्रीय मुकदमा नीति-2010 को कभी लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस अदालत ने राष्ट्रीय मुकदमा नीति के कार्यान्वयन संबंधी एक रिट याचिका को पहले खारिज कर दिया था।

इस पर, न्यायमूर्ति मिड्ढा ने कहा कि इस अदालत का मानना है कि सरकारी मुकदमे में जवाबदेही संबंधी निर्देश जनहित याचिका की प्रकृति के तहत आते हैं और इसलिए इस मामले को जनहित याचिका पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करना उचित होगा। मुख्य न्यायाधीश के आदेश के अधीन रहते हुए इस मामले को 15 जुलाई के लिए खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें। अदालत ने उसकी सहायता के लिए न्याय मित्र के रूप में नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता ए एस चंडियोक और न्यायमूर्ति मिड्ढा से संबद्ध कानून शोधकर्ता अक्षय चौधरी की बहुमूल्य सहायता और उनके व्यापक शोध की सराहना की।

आठ जून तक सरकार के पौने पांच लाख मामले लंबित थे
अदालत ने बताया कि कानूनी मामलों के विभाग द्वारा सरकारी विभागों और मंत्रालयों के विभिन्न अदालती मामलों की निगरानी और संचालन के लिए विकसित एक वेब-आधारित पोर्टल कानूनी सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली (एलआईएमबीएस) के अनुसार, आठ जून, 2021 तक सरकार के 4,79,236 मामले, अनुपालन के लिए 2,055 मामले और अवमानना के 975 मामले लंबित थे।
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वित्त मंत्रालय के लंबित केस सबसे ज्यादा, रेलवे के दूसरे नंबर पर
इसमें कहा गया है कि वित्त मंत्रालय के सबसे ज्यादा 1,17,808 लंबित मामले हैं, जबकि रेलवे 99,030 मामलों के साथ इस संबंध में दूसरे नंबर पर है।
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