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वैवाहिक दुष्कर्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, आईपीसी की धारा 377 और 375 में थी विसंगति, पढ़िए क्या है पूरा मामला

Wed, 19 Jan 2022 10:35 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई की जिनमें वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में रखने का अनुरोध किया गया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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वैवाहिक दुष्कर्म के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की पूर्ववर्ती धारा 377 और दुष्कर्म अधिनियम में विसंगति थी। यह विसंगति पुरुष को पत्नी के साथ बिना सहमति के यौन संबंध बनाने के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध के खिलाफ अभियोजन से संरक्षण प्रदान करती है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में इस धारा को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था। हाईकोर्ट ने यह बात उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही जिनमें वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में रखने की मांग की गई है।

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न्यायाधीश राजीव शकधर और सी हरि शंकर की पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध के लिए सजा) को अपराध से मुक्त किए जाने से पहले, हम विषम लैंगिक जोड़ों के बारे में बात कर रहे हैं, क्या धारा 375 और 377 में विसंगति नहीं थी। पीठ ने कहा कि यह विडंबना है कि सुखी वैवाहिक जीवन में यह जारी रहा और किसी ने इसकी शिकायत नहीं की। इसने कहा कि अप्राकृतिक यौन संबंध भी यौन क्रिया का हिस्सा है और अगर इसमें दोनों पक्षों की सहमति है तो यह दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है।

गुरुवार को भी जारी रहेगी इस मामले की सुनवाई
उल्लेखनीय है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में दिए गए अपवाद के तहत अपनी अगर पत्नी की आयु 15 वर्ष से कम नहीं है तो पति का उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता है। हाईकोर्ट की टिप्पणी पर न्यायमित्र और वरिष्ठ वकील रेबेका जॉन ने कहा कि इस पर आईपीसी की धारा 377 लागू नहीं होती। जॉन ने कहा कि अगर हम एक अपवाद को देखते हैं तो ऐसी स्थिति में हम एक विसंगति को हावी होने की अनुमति नहीं दे सकते हैं। पीठ ने कहा है कि मामले पर सुनवाई गुरुवार को भी की जाएगी।
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केंद्र सरकार ने पहले हलफनामे में कही है यह बात
उधर, केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में दायर किए गए पहले हलफनामे में कहा गया है कि वैवाहिक दुष्कर्म को एक आपराधिक उल्लंघन नहीं बनाया जा सकता है। केंद्र के अनुसार यह एक ऐसी घटना बन सकती है जो विवाह की संस्था को अस्थिर कर सकती है और इसका इस्तेमाल पतियों को परेशान करने के लिए सरल हथियार के रूप में किया जा सकता है।दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि वैवाहिक दुष्कर्म को पहले से ही भारतीय दंड संहिता के तहत ‘क्रूरता के अपराध’ के रूप में शामिल किया जा चुका है।

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