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दिल्ली हाईकोर्ट का सख्त रुख: लोग मर रहे हैं पर अधिकारी नहीं ले रहे निर्णय

Thu, 03 Jun 2021 05:55 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

रूसी टीके स्पूतनिक-वी के उत्पादन को मंजूरी न देने पर जताई नाराजगी, फैसला सुरक्षित
 
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delhi high court - फोटो : PTI
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विस्तार
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देश में लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए टीका उत्पादन की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किए जाने पर उच्च न्यायालय ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

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अदालत ने कहा कि देश में बहुत अधिक गुंजाइश है और बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। लोग मर रहे हैं और अधिकारी निर्णय नहीं ले रहे। महामारी के दौरान भी उचित निर्णय न लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया जाना चाहिए। सही निर्णय न होने के चलते बहुत मौतें हो रही हैं। पेनासिया बायोटेक को रूसी टीके स्पूतनिक वी के उत्पादन की मंजूरी न देने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की।

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस नजमी वजीरी की खंडपीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि टीकों के निर्माण के लिए जल्द निर्णय लेने की जरूरत है। अधिकारियों में भय या मनोविकृति के कारण निर्णय लेने की क्षमता नहीं है।
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उन्हें डर है कि बाद में पुलिस पूछताछ व आडिट से उन्हें परेशानी होगी। अदालत ने वर्तमान हालात का हवाला देते हुए केंद्र से कहा कि आपके अधिकारियों को इसका एहसास नहीं हो रहा है। विदेशों से लोग आपके पास टीका उत्पादन के लिए आ रहे हैं। आपको वैक्सीन निर्माताओं से बात कर उन्हें देशभर में ले जाएं और उनकी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करें। उन्हें बताएं कि इस देश में टीका उत्पादन का हब उपलब्ध है।

पेनासिया बायोटेक ने रूसी कंपनी से किया है करार
दिल्ली की पेनासिया बायोटेक ने याचिका में कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए रूसी टीके स्पूतनिक वी के उत्पादन के लिए उसने रसियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) से करार किया है। कंपनी ने मध्यस्थता अवार्ड के तहत सरकार को पैसा जारी करने का आदेश देने की मांग की है।

केंद्र सरकार ने मांग का विरोध करते हुए कहा कि स्पूतनिक-वी टीके के उत्पादन से देश को कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि यह आरडीआईएफ द्वारा वैश्विक आपूर्ति के लिए होगा।

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें पता चला है कि इस कंपनी में पूंजी का निवेश आरडीआईएफ द्वारा प्रदान किया जाता है। कंपनी द्वारा बनाए गए टीकों के नमूने को अभी मंजूरी नहीं दी गई है।

कंपनी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने कहा कि आरडीआईएफ से सिर्फ अग्रिम रकम मिली है, लेकिन उसे और धन की जरूरत है, ताकि जल्द से जल्द 100 मिलियन यानी 10 करोड़ खुराक बना सके।

स्वदेशी टीकों के ट्रायल पर भी उठाए सवाल
अदालत ने देश में निर्मित टीकों के ट्रायल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा करना क्यों जरूरी है, जबकि आप उन्हीं टीकों को आयात करने पर ट्रायल से छूट दे रहे हैं। केंद्र के पास अटूट शक्तियां हैं। आपात स्थिति के चलते आप देश में बनने वाले टीकों को ट्रायल से छूट दे सकते हैं।

अदालत ने नियमों के पालन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आप नियम पुस्तिका से चिपके हुए हैं, जबकि वह खुद कहती है कि आपात स्थिति में आप कुछ भी कर सकते हैं। ऐसा करने का आपके पास अधिकार है। आपने समय पर निर्णय लिया होता तो आज टीका बाजार में होता और लोगों को बीमारी से राहत मिलती।

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