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Delhi High Court: 'वंदेमातरम' को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की याचिका पर केंद्र- दिल्ली सरकार को नोटिस

Thu, 26 May 2022 06:10 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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दिल्ली हाईकोर्ट। - फोटो : ANI
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उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम' के समान प्रचार के लिए एक नीति बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई नौ नवंबर तय की है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर नोटिस जारी किया है। अदालत ने राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई कि हर कार्य दिवस पर सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में 'जन गण मन' और 'वंदेमातरम' बजाया जाए और गाया जाए।

वहीं अदालत ने याचिकाकर्ता को सुनवाई से पहले ही याचिका सार्वजनिक करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे यह आभास होता है कि याचिका प्रचार के लिए दायर की गई है। अदालत के रवैये पर याचिकाकर्ता ने खेद व्यक्त किया है। अदालत ने उनके खेद को स्वीकार करते हुए कहा कि  इस तरह की प्रथा का सहारा नहीं लेना चाहिए। अदालत ने कहा कि वह वर्तमान जनहित याचिका पर विचार करेगी क्योंकि याचिकाकर्ता एक गंभीर वादी है।
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याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि वंदे मातरम के सम्मान में किसी दिशानिर्देश या नियम के अभाव में राष्ट्रगीत को असभ्य तरीके से गाया जा रहा है और फिल्मों और पार्टियों में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और इसे संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1950 में दिए गए बयान के मद्देनजर 'जन गण मन' के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए। देश को एक रखने के लिए 'जन गण मन' और 'वंदेमातरम' के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय नीति बनाना सरकार का कर्तव्य है। कोई कारण नहीं है कि यह किसी अन्य भावना को जगाए क्योंकि दोनों का फैसला संविधान निर्माताओं द्वारा किया जाता है।

उन्होंने कहा, 'जन गण मन' में व्यक्त भावनाओं को राज्य को ध्यान में रखते हुए व्यक्त किया गया है। हालांकि, 'वंदे मातरम' में व्यक्त की गई भावनाएं देश के चरित्र और शैली को दर्शाती हैं और समान सम्मान की पात्र हैं। याचिका में कहा गया है कि वंदे मातरम का कोई नाटकीयकरण नहीं होना चाहिए और इसे किसी भी तरह के शो में शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि जब भी इसे गाया या बजाया जाता है तो उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए उचित सम्मान और सम्मान दिखाना अनिवार्य होता है।

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