दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 साल से प्रोन्नत नहीं किए गए 500 से अधिक सीआईएसएफ निरीक्षकों की याचिका का जवाब नहीं देने के मामले में केंद्रीय गृह, कार्मिक मंत्रालयों व अन्य पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पांच साल में प्रोन्नति के प्रावधान के बावजूद इन सीआईएसएफ निरीक्षकों को पिछले 19 साल में प्रोन्नत नहीं किया गया है। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने 21 दिसंबर को आदेश जारी कर संबंधित लोगों को दिल्ली हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में 10 हजार रुपये जुर्माना जमा करने पर जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया था।
इस मामले के जवाबदाताओं में केंद्रीय गृह मंत्रालय, जिसके अंतर्गत सीआईएसएफ काम करता है, सीआईएसएफ महानिदेशक, यूपीएससी के अध्यक्ष और कार्मिक मंत्रालय शामिल हैं। हाईकोर्ट इस मामले में अब 3 फरवरी को सुनवाई करेगा। सीआईएसएफ के 540 से अधिक निरीक्षकों ने इस साल की शुरुआत में अदालत के समक्ष एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें 34 साल से अधिक की सेवा में केवल एक पदोन्नति (सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर तक) मिली। उनका आरोप है कि अब सहायक कमांडेंट (एसी) की रैंक पर अगली पदोन्नति के लिए भविष्य में उनके पास कोई संभावना नहीं है। 1987 और 2005 में भर्ती हुए निरीक्षकों ने अपनी व्यथा समझाने के लिए अदालत के समक्ष उपयुक्त आंकड़े भी पेश किए। याचिका में कहा गया कि 1987 में प्रत्यक्ष उप-निरीक्षक के रूप में सीआईएसएफ में शामिल हुए वरिष्ठतम निरीक्षक (कार्यकारी) को आज तक 28 वर्षों में केवल एक पदोन्नति (एसआई से निरीक्षक तक) अर्जित की है।