दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि चिकित्सा संसाधनों की कमी के कारण कोविड-19 मरीज खुद उपकरण खरीदने पर मजबूर हुए। उन्होंने तरल मेडिकल ऑक्सीजन के विकल्प के तौर पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स का रुख किया। यहां तक कि आपूर्ति की किल्लत के चलते विदेशों से इनकी खरीदी की।
हाईकोर्ट ने अदालत ने यह बातें कोविड-19 से पीड़ित रहे 85 वर्षीय गुरचरण सिंह की याचिका पर कहीं। सिंह ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए तोहफे के तौर पर आयात किए गए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पर आईजीएसटी वसूले जाने को चुनौती दी थी।
अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा कंसंट्रेटर्स पर एकीकृत माल एवं सेवा कर (आईजीएसटी) लागू किए जाने के निर्णय को 'असंवैधानिक' करार देते हुए कहा कि जिन लोगों ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए इनका आयात किया था अथवा किसी ने उन्हें तोहफे के तौर पर दिया था, उनसे यह शुल्क लेना अनुचित है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि उनके भतीजे ने बतौर तोहफे में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर अमेरिका से भेजा था ताकि उनकी सेहत में सुधार हो सके।
उपकरणों के लिए लोग खुद हाथ-पैर मार रहे
न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने उस तथ्य का भी न्यायिक संज्ञान में लिया कि तरल मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत न केवल दिल्ली में थी बल्कि देश के अधिकतर भागों में यही हाल था, जिसके चलते लोग ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स जैसे उपकरणों के लिए खुद ही हाथ-पैर मार रहे थे।
पीठ ने 21 मई के अपने आदेश में कहा, 'चिकित्सा संसाधानों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के चलते कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों और उनके रिश्तेदारों एवं मित्रों को उपकरण का इंतजाम स्वयं ही करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह तथ्य है कि अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बिस्तर उपलब्ध नहीं थे, जो कि गंभीर रूप से बीमार मरीज के लिए आवश्यक था, ऐसे में लोगों को अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ा। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स तरल मेडिकल ऑक्सीजन का उपयुक्त विकल्प नजर आया। देश में ऑक्सीजन सांद्रक की मांग के मुकाबले पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध नहीं होने के चलते लोग विदेशों से इस उपकरण के इंतजाम में लगे।