दिल्ली सरकार ने कोरोना योद्धाओं के ऑन ड्यूटी शहीद होने पर उनके परिवार वालों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर रखी है। इस नीति के अंतर्गत अभी तक डॉ. अनस सिद्दीकी और कुछ शिक्षकों सहित एक दर्जन से ज्यादा शहीदों के परिवारों को आर्थिक मदद दी भी जा चुकी है। लेकिन आरोप है कि अभी तक दिल्ली के 500 कोरोना योद्धाओं की ऑन ड्यूटी जान जा चुकी है और सरकार उन परिवारों तक सहायता नहीं पहुंचा रही है। आर्थिक सहायता देने में भी भेदभाव करने का आरोप लगाया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार से उसकी मुआवजा नीति पर के विषय में जानकारी मांगी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में ही अभी तक लगभग 113 डॉक्टरों की जान जा चुकी है। इसी प्रकार दिल्ली पुलिस के कम से कम 58 जवान अभी तक कोरोना के दौरान ड्यूटी करते हुए शहीद हुए हैं। भारी संख्या में शिक्षकों की मौत भी कोरोना ड्यूटी करते हुए हुई है। लेकिन इन सभी परिवारों तक अभी तक सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं पहुंचाई गई है।
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सचिन मोगा ने अमर उजाला से कहा कि अभी तक सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह डेंटल डाक्टरों को कोरोना शहीद मानती है या नहीं। इस पर कई बार सवाल करने के बाद भी अभी तक सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है, जबकि इस दौरान अभी भी उन लोगों से कोरोना ड्यूटी कराई जा रही है।
भाजपा ने लगाया भेदभाव का आरोप
दिल्ली प्रदेश भाजपा मीडिया सेल प्रभारी नवीन कुमार जिंदल ने कहा कि सरकार कोरोना योद्धाओं को आर्थिक सहयता देने में भी भेदभाव कर रही है। वह एक वर्ग के शहीद लोगों को तुरंत सहायता पहुंचाकर अपनी वाहवाही करा रही है तो दूसरे वर्ग के लोगों तक अभी तक कोई सहायता नहीं पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह के किसी भेदभाव से बाज आना चाहिए और दिल्ली के सभी कोरोना योद्धाओं के बलिदान का सम्मान करते हुए उनके परिवारों को तत्काल मदद पहुंचानी चाहिए।
जिंदल ने कहा कि दिल्ली सरकार आम लोगों को कोरोना काल में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने में असफल साबित हुई है। वह केंद्र सरकार की मदद के बिना बीमार लोगों को ऑक्सीजन तक की सुविधा उपलब्ध नहीं करा पाई है। सरकार को अपनी ही नाकामियों से सीखते हुए अब लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।