सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की याचिका पर उच्चतम न्यायालय में आज सुनवाई हो सकती है। बता दें कि उच्चतम न्यायालय में सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सीवीसी की जांच रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इससे पहले सीवीसी ने उनके मामले की जांच रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपा था। इस रिपोर्ट की एक कॉपी न्यायालय ने वर्मा को दी थी ताकि वह इसपर अपना पक्ष रख सके। इसके अलावा सीवीसी की रिपोर्ट अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को भी सौंपी गई थी।
न्यायालय ने सीवीसी रिपोर्ट की प्रति मुहैया कराने संबंधी सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के अनुरोध ठुकरा दिया था। न्यायालय ने कहा था कि सीबीआई में लोगों के भरोसे की रक्षा करने और संस्थान की पवित्रता बनाए रखने के लिए सीवीसी रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच कर रही है।
वर्मा ने उच्चतम न्यायालय में अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप के बाद सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें ड्यूटी से हटाने और छुट्टी पर भेजा गया था। इससे पहले 12 नवंबर को मामले की सुनवाई हुई थी। जिसमें सीवीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपी थी। इसके अलावा न्यायालय ने कहा कि वह सीबीआई के डीएसपी एके बस्सी की याचिका पर बाद में सुनवाई करेंगे। बस्सी को पोर्ट ब्लेयर ट्रांसफर कर दिया गया था और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार के आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के फैसले पर सवाल उठाए थे।
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा जांच सकेंगे अस्थाना केस की फाइलें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा को सीवीसी के कार्यालय में एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर से संबंधित मामले की फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है। साथ ही न्यायमूर्ति नजमी वाजिरी ने 7 दिसंबर तक अस्थाना के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में सीबीआई को यथास्थिति बनाए रखने का भी निर्देश दिया है।
अदालत अस्थाना, कुमार और बिचौलियों मनोज प्रसाद की अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। उच्च न्यायालय ने 23 अक्तूबर को सीबीआई को अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जिसे बार-बार बढ़ाया गया है। मामला मीट व्यवसायी मुईन कुरैशी से जुड़ा है।
अदालत ने वर्मा को गुरुवार सायं 4:30 बजे केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के कार्यालय में जाकर मामले से संबंधित फाइल का निरीक्षण करने की इजाजत दी है। अदालत के निर्देशानुसार इस दौरान सीबीआई के पुलिस अधीक्षक सतीश डागर उपस्थित रहेंगे।
अदालत ने शर्मा को शुक्रवार को फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति दी है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सभी दस्तावेज व फाइल सीवीसी के पास भेजी गई हैं, ताकि वर्मा के खिलाफ जांच की जा सके। हाईकोर्ट ने आलोक वर्मा व शर्मा को फाइल का निरीक्षण करने की अनुमति इस तर्क पर दी कि अस्थाना ने उनके खिलाफ बदनीयती से आरोप लगाए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि शर्मा द्वारा दिए गए दस्तावेज को अगले आदेश तक मुहरबंद कवर में रखा जाए।
एक हफ्ते में देना होगा जवाब
कोर्ट के समक्ष वर्मा के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल के पास मामले से संबंधित फाइल नहीं है। ऐसे में वे कैसे जवाब दायर कर सकते हैं। वहीं सीबीआई की अधिवक्ता राजदीव बेहुरा ने कहा कि एजेंसी के पास फाइल नहीं है। यह सीवीसी के पास है।
अस्थाना के अधिवक्ता ने कहा कि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सर्वोच्च न्यायालय ने सीवीसी को सीलबंद रिपोर्ट रखने को कहा है। अदालत ने अब वर्मा को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।