दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र, आरबीआई को और अन्य को पंजाब एंड महाराष्ट्र कॉपरेटिव (पीएमसी) बैंक से नकद निकासी पर लगी पाबंदी हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। इस याचिका में जमाकर्ताओं का बीमा कराने के लिए निर्देश देने के लिए कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी, 2020 को होगी।
मुख्य न्यायधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने वित्त मंत्रालय, दिल्ली सरकार, आरबीआई और पीएमएसी बैंक को नोटिस जारी कर याचिका पर रुख स्पष्ट करने को कहा। याचिका में ग्राहकों के बैंक में जमा पैसे के लिए 100 प्रतिशत बीमा कवर की मांग की गई है।
घोटाला सामने आने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पीएमसी बैंक पर पाबंदियां लगा दी थी। पीएमसी बैंक में हुए 4,355 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सामने आने के बाद आरबीआई ने पहले, तरलता संकट को ध्यान में रखते हुए राशि निकालने की सीमा 1,000 रुपये कर दी थी। इसे बाद में बढ़ा कर 40,000 रुपये (छह महीने के भीतर) कर दिया, जिससे ग्राहक तनाव में हैं।
व्हिसलब्लोअर के जरिए सामने आया घोटाला
पीएमसी घोटाले की जानकारी आरबीआई को एक व्हिसलब्लोअर के माध्यम से मिली, जिसके बाद 23 सितंबर को केंद्रीय बैंक ने पीएमसी को अपने नियंत्रण में ले लिया और नगद निकासी की सीमा तय कर दी। यकायक सामने आए घोटाले की वजह से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। देशभर में इस बैंक की 137 शाखाएं हैं और लगभग 51 हजार सदस्य हैं। इन सदस्यों ने पीएमसी में 11,617 करोड़ रुपये जमा किए हुए हैं।
पीएमसी घोटाला क्या है?
24 सितंबर 2019 की सुबह पीएमसी के लाखों ग्राहकों को जानकारी मिली कि रिजर्व बैंक ने पीएमसीबी को छह महीने के लिए अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसका सीधा सा मतलब यह था कि बैंक का प्रबंधन और संचालन छह महीने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हाथ में रहेगा। इस नियंत्रण का अर्थ यह था कि बैंक से जमा राशि की निकासी, ऋण आदि केंद्रीय बैंक द्वारा तय होगा। इस बीच रिजर्व बैंक ने बैंक से नकदी निकालने की सीमा एक हजार रुपये तक सीमित कर दी थी। घबराए खाताधारकों की सहूलियत के लिए जल्द ही रिजर्व बैंक ने निकासी की सीमा को पहले दस हजार फिर 25 हजार रुपये कर दिया।