शहर के सेंट जोंस चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे
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साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली के हर प्रमुख गली-मुहल्लों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का वायदा किया था। सरकार का दावा था कि वह अपने काम को पूरी मुस्तैदी से कर रही है और दिल्ली में जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। जबकि कांग्रेस और भाजपा, दोनों विपक्षी दलों ने अरविंद केजरीवाल के इस दावे को झूठा बताया था। लेकिन पहली बार अरविंद केजरीवाल सरकार ने मान लिया है कि दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगाने के काम में देरी हो रही है।
कैमरा लगाने वाली कंपनी पर 16 करोड़ का जुर्माना
सरकार ने कैमरे लगाने के काम में ढिलाई बरतने के लिए बीईएल नामक कंपनी पर 16 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने का आदेश भी दे दिया है, इस कंपनी को कैमरे लगाने का ठेका दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर 22 नवंबर से पहले दिल्ली में 1.40 लाख कैमरे नहीं लगा दिये जाते, तो यह जुर्माना कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से बढ़ाकर 32 करोड़ कर दिया जाएगा। हालांकि, अगर कंपनी समय पर काम पूरा कर देती है, तो यह जुर्माना माफ कर दिया जाएगा।
22 नवंबर तक लगने हैं कैमरे
विपक्ष ने आप सरकार पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के वायदे पर खरा न उतरने के लिए निशाना साधा था। जिसके बाद सरकार ने आनन-फानन में बीईएल कंपनी को 320 करोड़ रुपये में दिल्ली में 1.40 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने का ठेका दिया था। इस काम को 22 नवंबर तक पूरा किया जाना है। कांट्रैक्ट में यह बात शामिल है कि अगर समय से कैमरे नहीं लगाए गए, तो कंपनी पर कुल टेंडर राशि का दस फीसदी (32 करोड़ रुपये) जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन जांच में सामने आया है कि बीईएल कंपनी ने लगभग दो-तिहाई समय बीत जाने के बाद भी कुल संख्या के लगभग 11 फीसदी कैमरे ही लगाए हैं। जिसके बाद सरकार ने सख्ती दिखाते हुए काम में देरी करने पर कंपनी पर 16 करोड़ का जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
मनोज तिवारी ने भी लगाया आरोप
गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने भी सीसीटीवी कैमरे के मामले में अरविंद केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली में सीसीटीवी लगाने के नाम पर लीपापोती हो रही है और कहीं भी कैमरे नहीं लगाए जा रहे हैं। तिवारी ने कहा कि जो कैमरे लगाए भी जा रहे हैं, उनकी क्वालिटी बेहद खराब है और इसका फायदा दिल्ली के लोगों को नहीं मिलेगा।