दिल्ली की 20 से अधिक विधानसभा सीटों पर पूर्वांचलियों का दबदबा है। इन सीटों पर वे अकेले दम पर किसी पार्टी को चुनाव हराने या जिताने की कूवत रखते हैं, जबकि 22 के करीब अन्य सीटों पर भी पूर्वांचलियों का अच्छा प्रभाव है। दिल्ली की लगभग एक तिहाई आबादी वाले पूर्वांचलियों के बारे में यही माना जाता है कि दिल्ली में किसकी सरकार बनेगी, इसका निर्णय यही वर्ग करता है। यही कारण है कि कोई भी राजनीतिक दल इस वर्ग को नाराज नहीं करना चाहता। आम आदमी पार्टी ने 12 पूर्वांचलियों को मैदान में उतारकर इस वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाई है। भाजपा ने केवल पांच पूर्वांचलियों को टिकट दिया है, लेकिन उसने मनोज तिवारी, रविकिशन और दिनेश यादव निरहुआ को स्टार कैम्पेनर बनाकर पूर्वांचलियों को अपने खेमे में करने की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस भी कन्हैया कुमार जैसे लोगों को स्टार कैम्पेनर बनाकर इस वर्ग को अपनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह दिलचस्प होगा कि इस बार यह वर्ग किसकी तरफ मुड़ता है?
पूर्वांचली किसके वोटर?
दरअसल, दिल्ली में सबसे कमजोर तबके से लेकर ऊचें पदों तक पूर्वांचली लोग देखे जाते हैं। ऑटो चलाने वाले, अन्य ड्राइवर, श्रमिक वर्ग, रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले छोटे दुकानदार, छोटी मोटी नौकरी करने वाले ज्यादातर इसी वर्ग से आते हैं। दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले मतदाताओं का सबसे बड़ा वर्ग इन्हीं पूर्वांचलियों से आता है। यूपी और बिहार में यही वर्ग नरेंद्र मोदी की ताकत बनता है और भाजपा का झंडा लेकर चलने वालों में यही वर्ग सबसे आगे रहता है।
दिल्ली में पहले ये वर्ग पारंपरिक तौर पर कांग्रेस का वोटर हुआ करता था, लेकिन आम आदमी पार्टी के मुफ्त बिजली-पानी के चक्कर में पूर्वांचलियों का एक बड़ा हिस्सा विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ गया। केजरीवाल की पकड़ इन मतदाताओं पर अभी भी कमजोर नहीं पड़ी है। इस बार भाजपा ने झुग्गियों के बदले पक्के मकान देने का वादा कर इस वोटर वर्ग को अपने साथ लाने की रणनीति अपनाई है। गरीबों के बीच पक्के मकान का आकर्षण उन्हें भाजपा के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।
किसने दिया कितना टिकट
भाजपा ने इस चुनाव में लक्ष्मी नगर से अभय वर्मा, करावल नगर से कपिल मिश्रा, विकासपुरी से डॉ. पंकज कुमार सिंह, किराड़ी से बजरंग शुक्ला और संगम विहार से चंदन चौधरी को टिकट दिया है। भाजपा की तुलना में आम आदमी पार्टी ने लगभग एक दर्जन पूर्वांचली प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इनमें सबसे बड़े चेहरे गोपाल राय बाबरपुर से चुनाव मैदान में हैं, जबकि द्वारका से विनय मिश्रा, किराड़ी से अनिल झा, बुराड़ी से संजीव झा, पटपड़गंज से अवध ओझा, राजेंद्र नगर से दुर्गेश पाठक और मालवीय नगर से सोमनाथ भारती भी आम आदमी पार्टी के बड़े पूर्वांचली चेहरे चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा मॉडल टाउन से अखिलेश पति त्रिपाठी, रोहताश नगर से सरिता सिंह, शालीमार बाग से वंदना कुमारी भी इस चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
पूर्वांचल के एक भाजपा नेता ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली में केवल आठ फीसदी के करीब आबादी वाले जाट समुदाय को पार्टी ने 14 टिकट दिया है, लेकिन 30 फीसदी से अधिक मतदाताओं वाले पूर्वांचली समुदाय को केवल पांच टिकट दिया गया है। इससे पूर्वांचली मतदाताओं में कुछ नाराजगी है, और पार्टी को इस रणनीति का नुकसान हो सकता है, लेकिन पार्टी ने केंद्र से लेकर राज्यों तक में जिस तरह यूपी-बिहार के पूर्वांचलियों को महत्त्व दिया है, उससे पार्टी की इन मतदाता वर्ग में पैठ कमजोर नहीं हुई है।
पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष ने कहा- पूरा समाज भाजपा के साथ
दिल्ली भाजपा के पूर्वांचल मोर्चा अध्यक्ष संतोष ओझा ने अमर उजाला से कहा कि उनका समाज हमेशा से देश, सनातन संस्कृति और सभ्यता को महत्त्व देता आया है। वह व्यक्तिगत हानि-लाभ से ऊपर उठकर केवल राष्ट्र और संस्कृति को महत्त्व देते हुए अपनी प्राथमिकताएं तय करता है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचली समाज यह जानता है कि उसका व्यापक हित भाजपा के साथ जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि सब लोग एकजुट होकर भाजपा को जिताने के लिए मेहनत कर रहे हैं।
पूर्वांचलियों ने बदल दिए थे समीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता 2014 के दौरान अपने चरम पर थी। उनकी इसी लोकप्रियता के दौर में दिल्ली में 2015 में विधानसभा चुनाव हुए थे। लोग यही मानकर चल रहे थे कि मोदी की लोकप्रियता के सहारे भाजपा दिल्ली में भी बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन अरविंद केजरीवाल की मुफ्त बिजली-पानी की आंधी में मोदी की लोकप्रियता नहीं टिकी और केजरीवाल ने इन्हीं पूर्वांचलियों की मदद से दिल्ली की 70 में 67 सीटें जीतने का अद्भुत ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया।
भाजपा ने इस चुनाव में केवल दो पूर्वांचलियों को टिकट दिया था। पार्टी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय (हालांकि, कुछ लोग सतीश उपाध्याय को पूर्वांचली नहीं मानते) को भी टिकट नहीं दिया गया। माना जाता है कि पूर्वांचलियों की उपेक्षा और किरण बेदी को पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा बनाना भाजपा का कमजोर कदम था जिसका उसे नुकसान हुआ।
लगातार करते हैं पूर्वांचलियों का सम्मान- AAP
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव कौशिक ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा से पूर्वांचलियों का सम्मान किया है। 2013 के पहले ही चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 13 पूर्वांचली चेहरों को टिकट दिया था। इस बार भी पहली लिस्ट में ही 12 पूर्वांचली चेहरों को टिकट दिया गया। उन्होंने कहा कि हमने पूर्वांचलियों को विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी संगठन में ऊंचे पदों पर स्थान दिया। जबकि भाजपा इनके नाम पर केवल राजनीति करती है, लेकिन टिकट नहीं देती।