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कानों देखी: जब दिल्ली में चुनाव लड़ने के नाम पर सोनिया गांधी के सामने बगलें झांकने लगे थे नेता

Tue, 21 Jan 2020 08:24 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Subhash Copra and Arvinder Singh Lovely in Delhi Pradesh Congress Rally - फोटो : Social Media (File)
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दिल्ली में कांग्रेस का हाल उत्तर प्रदेश और बिहार जैसा हो गया है। पार्टी को न तो ढंग के प्रत्याशी मिल पाए, न चेहरा और न ही विधानसभा चुनाव का कोई दमखम दिखाई दे रहा है। दिल्ली के बड़े-बड़े कांग्रेस के नेता दिखावे का हाथी दांत होकर रह गए हैं। जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कुछ नेताओं से चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वह बगलें झांकने लगे। पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में ही कांग्रेस की हालत का अंदाजा लग रहा है।

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केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में तैयारी को देखकर कांग्रेस के अच्छे नेताओं ने चुप रहना ही सही समझा। बताते हैं पार्टी के शीर्ष स्टार प्रचारकों को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। हालांकि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव समेत अन्य ने प्रचार की योजना बनानी शुरू कर दी है।  दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको के करियर के लिए भी दिल्ली विधानसभा चुनाव अहम होने वाला है। अब तो पार्टी के भीतर यह भी सुगबुगाहट तेज है कि खाता खुल गया तो बड़ी बात है।

सबसे नायाब जनरल हैं सीडीएस विपिन रावत

सैन्य बलों के कॉडिोर में नव नियुक्त सीडीएस जनरल विपिन रावत काफी चर्चा में हैं। चर्चा का कारण जनरल की सूझ-बूझ से ज्यादा उनके मुंह का खुलना है। पूर्व जनरलों को भी एक जनरल के इतना बोलने पर आश्चर्य हो रहा है। एक पूर्व सैन्य प्रमुख का कहना है कि उनके नाम से मत प्रकाशित कीजिए, लेकिन मुझे काफी ताज्जुब हो रहा है। पूर्व एयरचीफ मार्शल बीएस धनोवा हों या पूर्व सेनाध्यक्ष और मौजूदा सीडीएस जनरल विपिन रावत की बयानबाजी कुछ ज्यादा हो रही है।

जनरल रावत का बयान तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तुलना में काफी ज्यादा आ रहा है। पूर्व जनरल का कहना है कि जनरल बोलता नहीं, अपना लक्ष्य साधता है। लेकिन इधर कुछ साल से माहौल थोड़ा बदला-बदला सा है।

हाईटेक प्रचार में आम आदमी पार्टी करेगी भाजपा का मुकाबला

भाजपा ने दिल्ली के मतदाताओं का मूड समझ कर प्रचार अभियान की रणनीति तैयार की है। सड़क से लेकर तकनीक तक का सहारा लेकर प्रचार अभियान को धार दी जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर शार्ट फिल्म समेत सभी तरह की सामग्री तैयार है। पार्टी के एक नेता जी का कहना है कि 23 जनवरी के बाद दिल्ली में भाजपा जनता के बीच उतरकर चुनावी माहौल को बदल देगी।

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भाजपा की हर काट के लिए आम आदमी पार्टी भी तैयार है। पार्टी ने चुनाव प्रचार सामग्री की तैयारी के लिए प्रोफेशनल्स की सहायता ली है। तकनीक के इस्तेमाल में आम आदमी पार्टी कहीं से भी भाजपा से पीछे नहीं रहने वाली है। हालांकि आम आदमी पार्टी के नेता जनता के बीच में अपने सस्ते, साधारण से दिखने वाले प्रचार की छवि भी बनाए रखना चाहते हैं। पार्टी के लिए प्रचार की रणनीति का हिस्सा बने सूत्र का कहना है कि आम आदमी के प्रचार की खासियत है कि वह तकनीक, संसाधन के इस्तेमाल के साथ साथ कार्यकर्ताओं और आमजनों की जमकर भागीदारी सुनिश्चित करेगी। भाजपा और आम आदमी दोनों ने एक दूसरे खिलाफ प्रचार, दुष्प्रचार के काट की भी योजना बनाई है। इसके लिए भी दोनों दलों के प्रचारकों ने पूरी तैयारी कर ली है।

शाहीनबाग, तुर्कमानगेट...जाफराबाद दिलाएगा जीत

भाजपा के नेता शाहीन बाग में शुरू हुए महिलाओं के प्रदर्शन को अपने लिए तुरुप का इक्का मानकर चल रहे हैं। प्रकाश जावड़ेकर की टीम के एक सदस्य का कहना है कि शाहीन बाग में आए दिन कांग्रेस पार्टी के नेता पहुंच रहे हैं। इसके अलावा अन्य लोग भी जा रहे हैं। बताते हैं शाहीन बाग जैसा आंदोलन जितना जोर पकड़ेगा, उतना भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव समेत देश के अन्य हिस्से में फायदा होगा। सूत्र का कहना है कि इस बारीकी को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की टीम समझ रही है। इसलिए वह इस हवन में आहुति डालने से बच रही है। भाजपा के रमनीतिकारों का अनुमान है कि कांग्रेस के नेताओं के जाने से मुसलमान अल्पसंख्यक मतदाताओं का दोनों दलों (आप और कांग्रेस) में बंटवारा होगा। इसका लाभ भाजपा को मिलेगा।

मायावती भी परेशान हैं

बसपा प्रमुख मायावती अभी तक बेबाक राजनीति करती आई हैं, लेकिन अब वह थोड़ा परेशान चल रही हैं। बसपा सूत्रों की मानें तो बसपा की परेशानी की दो बड़ी वजह है। पहली वजह भीम आदमी के चंद्रशेखर हैं। वह सहारनपुर मंडल से लेकर दिल्ली तक चर्चित हो रहे हैं। चंद्रशेखर युवा हैं, क्रांतिकारी तेवर दिखा रहे हैं और इसके कारण दलितों के बीच में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। दूसरी बड़ी वजह कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी और भाजपा की रणनीति बन रही हैं।

प्रियंका गांधी लगातार उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं, वहीं भाजपा लगातार बसपा के जनाधार में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। बसपा प्रमुख की समस्या यह है कि पहले वह अपने धारदार बयान से अपने मतदाताओं में जान फूंकती रहती थी। अब उन्हें किन्हीं कारणों से कुछ ज्यादा खामोश रहना पड़ रहा है। खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तो वह कोई बड़ा राजनीतिक हमला करने से बच रही हैं।

बिहार में महागठबंधन के सीएम तेजस्वी ही बनेंगे...

राजद अपने नेतृत्व में महागठबंधन का खाका तैयार कर रही है। समान विचारधारा वाले संभावित दलों के नेता अपने आपको राज्य का भावी मुख्यमंत्री मानकर चल रहे हैं। कांग्रेस पार्टी भी बिहार में चुनाव का माहौल खड़ा करने के लिए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को आगे कर रही है। इसमें सबसे ज्यादा दांव-पेंच रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी चल रहे हैं। इन सबके बीच में राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं का कहना है कि जो चाहे जितना खेल कर ले लेकिन महागठबंधन का सबसे बड़ा दल राजद ही है। राजद का मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव हैं और पार्टी इस बार लोकसभा चुनाव 2019 वाली कोई गलती नहीं करने वाली है।

नीतीश जी बुरे फंसे

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फंसा दिया है। शाह ने इस बार नीतीश कुमार को नखरे दिखाने का अवसर ही नहीं दिया। अपनी रैली में बोल आए कि भाजपा और सहयोगी दल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। अमित शाह का यह बयान नीतीश के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। पार्टी के नेता सीएए, एनपीआर, एनआरसी को लेकर जनता के कड़वे सवाल झेल रहे हैं। वह नीतीश कुमार से पार्टी का स्टैंड जानना चाह रहे हैं और कुमार हैं कि दो कदम आगे और तीन कदम पीछे चल रहे हैं। जद (यू) के नंबर तीन समझे जाने वाले एक नेता का कहना है कि यही हाल रहा तो नंबर एक पर भाजपा और नंबर दो पर जद (यू) के सिमट जाने का खतरा पैदा हो जाएगा।

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