फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झारखंड में हार से सबक लेकर एनडीए के सहयोगियों को साधने में जुटी भाजपा

Wed, 22 Jan 2020 03:21 AM IST
योगेश साहू हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।

सार

  • झारखंड में ना के बाद जदयू-लोजपा के लिए दिल्ली में हां
  • दिल्ली चुनाव बाद सहयोगी को राजग संयोजक का पद देने पर मंथन
विज्ञापन
बीजेपी रैली - फोटो : Amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा चुनाव में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन करने में विफल रही भाजपा अब सहयोगियों का सुध ले कर राजग की सेहत सुधारने की तैयारी में है। झारखंड में जदयू-लोजपा को सीटें देने से मना करने के बाद दिल्ली में भाजपा का इन दो दलों के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन इसी आशय का संकेत है।

विज्ञापन


इसी कड़ी में पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव बाद सहयोगी को राजग का संयोजक बनाएगी। हालांकि जदयू-लोजपा से समझौते को इसी साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल झारखंड विधानसभा चुनाव में सीटों पर सहमति नहीं बनने के कारण आजसू ने भाजपा से नाता तोड़ा तो पार्टी ने जदयू और लोजपा को तवज्जो नहीं दी।

चुनाव परिणाम प्रतिकूल आने के बाद चर्चा थी कि अगर भाजपा सहयोगियों को महत्व देती तो सकारात्मक परिणाम आ सकते थे। इससे पहले हरियाणा में मनमाफिक नतीजे नहीं आने और महाराष्ट्र में सत्ता गंवाने के बाद सहयोगी दलों ने भाजपा पर हमला बोला था। लोजपा के चिराग पासवान ने राजग में समन्वय नहीं होने का आरोप लगाते हुए तत्काल संयोजक नियुक्त करने की मांग की थी।
विज्ञापन


सहयोगियों की चिंता क्यों?
दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद राजग से शिवसेना और आजसू ने दूरी बनाई है। जबकि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ असम गण परिषद के बाद शिरोमणि अकाली दल ने सीधा मोर्चा खोला है। मुस्लिम वोट छिटकने के डर से लोजपा और जदयू भी असहज हैं। लोजपा ने सीएए पर सही संदेश नहीं देने तो जदयू ने इस कानून पर और चर्चा कराने की मांग की है। जाहिर है कि सहयोगियों के रुख से भाजपा चिंतित है।

दिल्ली चुनाव बाद व्यापक विमर्श

भाजपा सूत्रों का कहना है कि दिल्ली चुनाव के बाद पार्टी राजग को मजबूत बनाने और सहयोगियों की नाराजगी दूर करने की दिशा में व्यापक पहल करेगी। इसके तहत सहयोगी दल के किसी वरिष्ठ नेता को राजग के संयोजक पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके अलावा मंत्रिमंडल विस्तार में भी छूटे सहयोगियों को शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन

बिहार भी वजह

दिल्ली में जदयू-लोजपा गठबंधन की वजह इसी साल बिहार में होने वाला विधानसभा चुनाव और दलित-पूर्वांचली मतदाता भी हैं। लोजपा के सहारे पार्टी दिल्ली के दलित मतदाताओं को संदेश देना चाहती है, जबकि लोजपा-जदयू के सहारे पूर्वांचली मतदाताओं को।

इसके अलावा इस गठबंधन के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार में लोकसभा चुनाव की तरह भाजपा-लोजपा-जदयू गठबंधन जारी रहेगा। राज्य में भाजपा-जदयू के बीच समय समय पर सामने आ रहे मतभेद के कारण चुनाव पूर्व गठबंधन पर कयास लगते रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें