दिल्ली के झंडेवालान मंदिर में हर श्री नाथ जी मंदिर के कुछ हिस्से को डीडीए की तरफ से तोड़ा गया है। इसके बाद रविवार को मंदिर में भारी संख्या में पहुंचे भक्तों ने पूजा-अर्चना की और भगवान लक्ष्मी नारायण जी के दर्शन किए। बता दें कि डीडीए की कार्रवाई के बाद लोगों में खासी नाराजगी देखने को मिली है।
दिल्ली के झंडेवालान मंदिर में स्थित हर श्री नाथ जी मंदिर के आसपास ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद भी पूजा-पाठ और सेवा का कार्य जारी है। मंदिर में भक्तों का आना जाना पहले की तरह शुरू हो चुकी है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद मंदिर के सेवकों और श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश देखा गया था, लेकिन अब मंदिर का कामकाज सामान्य तरीके से संचालित होने लगा है।
विज्ञापन
श्री नाथ जी मंदिर को लेकर लोगों में आस्था मजबूत
करोल बाग क्षेत्र में बना हर श्री नाथ जी मंदिर की लोगों के बीच काफी आस्था है। यह एक ऐसी विरासत है जिसने भारत के अलग-अलग राज्यों में लाखों सेवकों को जोड़ा हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे गोरखनाथ परंपरा का आध्यात्मिक केंद्र भी मानते हैं जहां भक्ति, सुमिरन और सेवा को धर्म का मूल मानकर जिया जाता है। मंदिर से जुड़े सेवक बताते हैं कि 80 वर्षों पहले स्थापित यह स्थान, आधुनिक दिल्ली में परंपरा और अध्यात्म का एक अनोखा संगम रहा है, जहां रोजाना सैकड़ों लोग पूजा, भजन और सत्संग के माध्यम से मानसिक और सामाजिक शांति प्राप्त करते रहे हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई में तोड़ा गया मंदिर का कुछ हिस्सा
डीडीए की प्रशासनिक कार्रवाई में मंदिर के कुछ हिस्से को तोड़ दिया गया था। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हो गई थी। मंदिर के सेवक राम नारायण जी ने बताया कि यहां रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए प्रसाद बनता था। इस स्थल को ध्वस्त करने से हमारी आस्था पर चोट पहुंची है। लेकिन ध्वस्तीकरण के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था कम नहीं हुई।
मंदिर प्रांगण में रविवार को उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
रविवार को मंदिर प्रांगण में सैकड़ों लोग एकत्र हुए और सामूहिक रूप से नाम संकीर्तन, भजन और भगवान लक्ष्मी नारायण जी के दर्शन किए। पूरे परिसर में भक्ति और शांति का वातावरण रहा। रविवार को उपस्थित सैकड़ों लोगों की भीड़, ऊंची आवाज में गाए जा रहे भजन, और भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन के लिए उमड़े भक्तों ने यह संदेश दिया कि मंदिर लोगों की भक्ति, सेवा और जुड़ाव से खड़ा होता है। और यही भक्ति, यही परंपरा इस मंदिर की बुनियाद है।