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दिल्ली रक्षा संवाद: 'पारंपरिक और गैर-पारंपरिक युद्ध के बीच अंतर तेजी से धुंधला हो रहा'; राजनाथ सिंह क्या बोले?

Tue, 03 Nov 2026 04:41 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारियों को तकनीकी तैयारियों से अलग नहीं रखा जा सकता। उन्होंने आत्मनिर्भरता को तकनीकी संप्रभुता बताते हुए रक्षा क्षेत्र में सहयोग और स्वदेशी क्षमताओं पर जोर दिया। आखिर 2047 तक रक्षा क्षेत्र भारत के लक्ष्य को लेकर उन्होंने क्या कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की कोशिश के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा क्षेत्र की जरूरतें बाहरी निर्भरता के कारण न रुकें।
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दिल्ली रक्षा संवाद में राजनाथ सिंह ने युद्ध में तकनीक की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारियों को तकनीकी तैयारियों से अलग नहीं किया जा सकता।
 
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2047 तक रक्षा क्षेत्र का लक्ष्य क्या होना चाहिए?
राजनाथ सिंह ने कहा, जब हम 2047 को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहे हैं, तो रक्षा क्षेत्र में हमारा लक्ष्य महत्वाकांक्षी होना चाहिए। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आज पारंपरिक और गैर-पारंपरिक युद्ध के बीच का अंतर तेजी से धुंधला होता जा रहा है।

दिल्ली स्थित मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) ने इस संवाद का आयोजन किया था। इसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। देश और विदेश के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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आत्मनिर्भरता का असली मतलब क्या है?
रक्षा मंत्री ने कहा, आत्मनिर्भरता को तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की कोशिश के रूप में समझा जाना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हम हर चीज का उत्पादन खुद करें... इसका मतलब यह सुनिश्चित करना है कि रक्षा क्षेत्र की हमारी जरूरी जरूरतें बाहरी निर्भरता के कारण किसी के हाथों में बंधक न बनें।
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उन्होंने आगाह किया कि सहयोग के बिना आत्मनिर्भरता हमारे तकनीकी दायरे को सीमित कर सकती है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से देश की अपनी क्षमताएं मजबूत होनी चाहिए। साथ ही, इससे मिलकर तकनीक विकसित करने में भी मदद मिलनी चाहिए।

क्या आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से दूरी बनाना है?
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की कोशिश का मतलब 'दुनिया से पीछे हटना नहीं है'। इसके बजाय, आत्मनिर्भरता की कोशिश भारत को दुनिया के साथ बेहतर तरीके से जुड़ने का मौका देती है।
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