राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' की स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक को जमानत दे दी है। हालांकि मैथ्यू, दिल्ली से बाहर नहीं जाएगा। वह जांच में सहयोग करेगा। विशेष अदालत ने एक लाख रुपये के बेलबॉन्ड और एक लाख रुपये की श्योरिटी पर आरोपी को जमानत दी है। पिछले दिनों मैथ्यू सहित सात विदेशी नागरिकों के मामले में एनआईए ने जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें सभी आरोपियों के खिलाफ 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 'यूएपीए' की धारा 18' हटा ली गई थी। चार्जशीट में केवल 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट', 2025 की धारा 21 व 23 लिखी थी। ये दोनों धाराएं फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस के स्तर पर समझौता योग्य अपराध की श्रेणी में आती हैं।
मैथ्यू एरन वैनडाइक सहित सात विदेशी नागरिकों पर आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने और उग्रवाद से संबंधित कैंप आयोजित करने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। एनआईए के आरोपों में कहा गया था कि ये सभी विदेशी नागरिक, म्यांमार के जातीय समूहों के संपर्क मे थे। वहां पर ये लोग, समूहों के सदस्यों को ड्रोन एवं घातक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। यह आरोप भी लगा था कि इन्होंने दूसरे मुल्कों से जातीय समूहों के लिए ड्रोन का इंतजाम किया था।
एनआईए की स्पेशल कोर्ट 'राऊज एवेन्यू' ने आरोपी को डिफॉल्ट बेल दी है। कोर्ट ने कहा, आरोपी को जांच के सिलसिले में जब भी एनआईए द्वारा बुलाया जाएगा, उसे हाजिर होना पड़ेगा। बता दें कि आरोपी मैथ्यू एरन वैनडाइक ने जांच में देरी की बात कह कर डिफॉल्ड बेल यानी जमानत देने का आग्रह किया था। विशेष अदालत ने मैथ्यू को जमानत देते वक्त यह बात साफ कर दी है कि इस मामले में गिरफ्तार अन्य छह युक्रेनी नागरिकों के पास भी जमानत लेने का अधिकार है। वजह, एनआईए ने अपनी चार्जशीट में उक्त सभी आरोपियों के खिलाफ लगी यूएपीए की धारा हटा ली थी। हालांकि जांच एजेंसी का कहना था कि यूएपीए के एंगल से जांच जारी रहेगी। आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील रोहित डंडरियाल, जिन्होंने एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष आरोपियों का पक्ष रखा, ने इस केस में जांच एजेंसी पर सवाल खड़े किए थे। जब चार्जशीट दाखिल हुई, तब वकील ने कहा था कि आरोपियों को 180 दिन पहले पकड़ा गया था। उस वक्त जांच एजेंसी ने आतंकी साजिश की बात कही थी। वकील की दलील थी कि वे लोग घूमने आए थे। उनके पास सभी तरह के दस्तावेज थे। इसके बावजूद उन्हें तीस दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया। उसके बाद वह अवधि 90 दिन तक बढ़ा दी गई।
रोहित डंडरियाल ने कोर्ट से उन्हें छोड़ने की प्रार्थना की थी। उनका कहना था कि हर पहलू से मामले की जांच हो चुकी है। जांच एजेंसी के वकील का कहना था कि अभी वायस सैंपल आदि लेने हैं। कई दूसरे पहलुओं से केस की जांच होनी है। इस आधार पर 90 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया। 180 दिन की जांच के बाद भी एनआईए को यूएपीए जैसा अपराध नहीं मिला। जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। हालांकि जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया कि इस केस में यूएपीए के एंगल से जांच खत्म नहीं हुई है। फिलहाल इस धारा को जांच में पेंडिंग रखा गया है। आगे की जांच में अगर यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता है तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी, सप्लीमेंट्री आरोप पत्र दायर कर सकती है।
एनआईए की तरफ से इन सभी नागरिकों पर आरोप लगाए गए कि ये पर्यटक वीजा पर भारत आए थे। उसके बाद ये लोग मिजोरम पहुंचे। वहां से उन्होंने अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया। दूसरे मुल्क में ये लोग हथियारबंद जातीय समूहों के बीच रहे। उन्हें हथियार चलाना और हमले के लिए ड्रोन आदि का इस्तेमाल करना सिखाया। म्यांमार से ये लोग दोबारा भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए। एनआईए ने इन सभी विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरोन वैन डाइक को कोलकाता से, तीन यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ से हिरासत में लिया गया।