दिल्ली कोचिंग हादसा
- फोटो : AMAR UJALA
दिल्ली कोचिंग हादसा देशभर में इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। इस दुखद घटना की जांच अब सीबीआई करेगी। बीते दिन दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई जहां घटना की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का फैसला हुआ। इस दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार से लेकर दिल्ली पुलिस और एमसीडी तक को कड़ी फटकार लगाई और कई तीखे सवाल पूछे। अदालत ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि तीन करोड़ से ज्यादा की आबादी वाली दिल्ली को अधिक आधुनिक भौतिक और प्रशासनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत है। दिल्ली में कई अधिकारी हैं जो केवल एक दूसरे पर दोष मढ़ते हैं।
उधर इस दर्दनाक घटना के बाद छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र कोचिंग केंद्रों में अपनी पुख्ता सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। वहीं एमसीडी भी नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।
आइये जानते हैं कि दिल्ली में कोचिंग केंद्र हादसे की क्या घटना है? घटना की वजह क्या है? हादसे के बाद कार्रवाई क्या हुई? छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? हादसे पर कोचिंग संचालकों का क्या कहना है? मामला अदालत तक कैसे पहुंचा और वहां क्या हुआ?
दिल्ली कोचिंग हादसा
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पहले जानते हैं कि अदालत में क्या हुआ है?
दुखद घटना में तीन छात्रों की मौत का मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। पहले 31 जुलाई फिर 2 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। पहले दिन की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में डूबकर हुई तीन छात्रों की मौत पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक अजीब जांच चल रही है, जिसमें कार चलाने वाले राहगीर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है, लेकिन एमसीडी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अदालत ने पूछा था कि क्या अब तक किसी एमसीडी अफसर को हिरासत में लिया गया है? साथ ही यह भी पूछा कि क्या इस मामले में एमसीडी के अधिकारियों की जांच हुई?
दिल्ली कोचिंग हादसा
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दूसरे दिन की कार्यवाही में दो अहम आदेश दिए
दूसरे दिन की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और एमसीडी के अधिकारियों से घटना पर तीखे सवाल दागे। दिल्ली पुलिस द्वारा कोचिंग संस्थान के पास से गुजरी एसयूवी के चालक को गिरफ्तार करने का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा शुक्र है कि आपने बेसमेंट में घुसने के लिए बारिश के पानी का चालान नहीं काटा, जिस तरह से आपने एसयूवी चालक को वहां कार चलाने के लिए गिरफ्तार किया। अदालत ने एमसीडी और पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा एमसीडी अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है और यह एक सामान्य बात हो गई है।
पीठ ने केंद्रीय सतर्कता आयोग आयुक्त को सीबीआई जांच की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है ताकि जांच समय पर हो। पीठ ने कहा घटना की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि जांच के संबंध में जनता को कोई संदेह न हो, यह अदालत जांच को सीबीआई को सौंपती है।
कोचिंग सेंटर के बाहर प्रदर्शन
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बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए समिति का गठन
इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान दिल्ली के वर्षों पुराने बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाए। उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी के भौतिक, वित्तीय और प्रशासनिक बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए एक समिति का गठन किया। पीठ ने कहा कि दिल्ली के संपूर्ण बुनियादी ढांचे, भौतिक और प्रशासनिक, पर पुनर्विचार की जरूरत है। समिति की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे और इसमें डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एमसीडी आयुक्त भी शामिल होंगे।
अदालत ने आदेश सुनाते हुए कई अहम टिप्पणियां भी कीं। अदालत ने कहा कि उसका मानना है कि हमें बड़ी तस्वीर देखने की जरूरत है। चूंकि दिल्ली शहर में कहीं ज्यादा बुनियादी समस्या है, भौतिक, वित्तीय और प्रशासनिक बुनियादी ढांचा सभी पुराने हो चुके हैं और आज की दिल्ली की जरूरतों के हिसाब से नहीं हैं। तीन करोड़ से ज्यादा की आबादी वाली दिल्ली को अधिक आधुनिक भौतिक और प्रशासनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत है। अदालत ने कहा कि विभिन्न सब्सिडी योजनाओं के कारण दिल्ली में पलायन बढ़ रहा है और इसकी आबादी भी बढ़ रही है।
Delhi Coaching Centre incident
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दिल्ली में नागरिक एजेंसियों के पास प्रमुख बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए धन नहीं
अदालत ने कहा कि उसका यह निष्कर्ष गलत नहीं होगा कि दिल्ली में नागरिक एजेंसियों के पास प्रमुख बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए धन नहीं है। पीठ ने कहा कि दिल्ली में नालियों जैसी भौतिक अवसंरचना करीब 75 साल पहले बनाई गई थी। कम से कम भौतिक अवसंरचना पर्याप्त नहीं है और इसका रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता है।
इसके अलावा, अदालत ने कहा कि हाल की घटनाओं से पता चलता है कि नागरिक एजेंसियां न्यायिक निर्देशों का अक्षरशः पालन नहीं करती हैं। वहीं प्रशासनिक रूप से, दिल्ली में कई अधिकारी हैं जो केवल जिम्मेदारी एक दूसरे पर डालते हैं और एक दूसरे पर दोष मढ़ते हैं। अदालत की ओर से कहा गया कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि दिल्ली एक संकट से दूसरे संकट की ओर जा रही है, जहां एक दिन सूखे की समस्या होती है और दूसरे दिन बाढ़ आती है। पीठ ने कहा कि अब समय आ गया है कि दिल्ली के प्रशासनिक, भौतिक और वित्तीय बुनियादी ढांचे पर फिर से विचार किया जाए।
Delhi Coaching Centre Flood
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सरकार से सवाल- मुफ्तखोरी की संस्कृति में जी रहे हैं
दिल्ली हाईकोर्ट के एसीजे मनमोहन ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा, 'अगर आप मुफ्तखोरी की संस्कृति में जी रहे हैं। आपको नहीं पता होगा कि ढांचे को कैसे बदला जाए। जीएसटी में एक बदलाव से राजस्व बढ़ जाएगा। आपको अलग तरीके से सोचना होगा। अगर आपको दिल्ली जैसी जगह पर राजस्व नहीं मिलेगा, तो आपको यह कहीं और भी नहीं मिलेगा।'
पीठ ने एमसीडी आयुक्त से यह भी कहा कि नगर निकाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिल्ली में पानी का प्रवाह बना रहे और यदि जल निकासी की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है तो उसे जल्दी किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन करते छात्र
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दिल्ली में कोचिंग केंद्र हादसे की क्या घटना है?
दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में 27 जुलाई को एक बड़ा हादसा हुआ। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली राव एकेडेमी के बेसमेंट में पानी में डूबकर तीन बच्चों की मौत हो गई। राष्ट्रीय राजधानी में 27 जुलाई की शाम अचानक हुई बारिश के कारण लाइब्रेरी में पानी भर गया था। मृतकों दो छात्र और एक छात्रा शामिल थे। तीनों यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। मृतकों की पहचान तेलंगाना निवासी तान्या सोनी, केरल निवासी नेविन डाल्विन और यूपी निवासी श्रेया यादव के रूप में हुई।
Delhi Coaching Centre Flood
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हादसे की वजह क्या पता चली?
29 जुलाई को दिल्ली के मुख्य सचिव ने दिल्ली सरकार को अपनी रिपोर्ट को सौंपी। इस रिपोर्ट में बताया गया कि राजेंद्र नगर स्थित राव कोचिंग संस्थान ने ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया था। साथ ही संस्थान में बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए हैं।
एमसीडी की रिपोर्ट में कहा कि जिस प्रॉपर्टी में कोचिंग सेंटर चल रहा था, उसकी पार्किंग की ऊंचाई आसपास की प्रॉपर्टी के मुकाबले कम था। इलाके की अन्य इमारतों में भारी जलभराव की स्थिति में बारिश के पानी को पार्किंग एरिया और बेसमेंट में जाने से रोकने के लिए बैरियर वॉल लगाई गई थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कोचिंग सेंटर बिल्डिंग के सुरक्षा कर्मचारियों ने कोई निगरानी नहीं रखी, जिसके चलते पानी बिना रुके पार्किंग एरिया को पार कर बेसमेंट में घुस गया।
कोचिंग सेंटर सील
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हादसे के बाद क्या-क्या कार्रवाई हुई?
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने राव आईएएस स्टडी सर्किल के मालिक अभिषेक गुप्ता और समन्वयक देशपाल सिंह पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही के आरोप में मामला दर्ज किया गया। 28 जुलाई को दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
अगले दिन एक और कार्रवाई में दिल्ली पुलिस ने पांच और लोगों की गिरफ्तारी की। 29 जुलाई को गिरफ्तार किए गए लोगों में बेसमेंट के चार सह-मालिक और एक राहगीर मनोज कथूरिया शामिल थे। हालांकि, दिल्ली किए तीस हजारी कोर्ट ने 1 अगस्त को फोर्स गोरखा के ड्राइवर मनोज कथूरिया को जमानत दे दी। मनोज पर आरोप था कि उन्होंने अपनी कार को बारिश के पानी से भरी सड़क पर चलाया, जिससे पानी बढ़ गया, कोचिंग सेंटर की तीन मंजिला इमारत के गेट टूट गए। बेसमेंट में पानी भरने से तीन आईएएस अभ्यर्थियों की मौत हो गई।
29 जुलाई को ही गृह मंत्रालय ने घटना की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी। कहा गया कि समिति कारणों की जांच करेगी, जिम्मेदारी तय करेगी, उपाय सुझाएगी और नीतिगत बदलावों की सिफारिश करेगी।
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने घटना के संबंध में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को नोटिस भेजा। नगर निगम को भेजे नोटिस में पुलिस ने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज मांगे और यह भी पूछा कि इसकी देखरेख के लिए कौन सा अधिकारी जिम्मेदार है। नोटिस में यह सवाल पूछा गया कि क्षेत्र में सफाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है और क्या यह कार्य ठेके के आधार पर दिया गया था।
घटना के बाद से बुलडोजर से कोचिंग सेंटर के पास से अतिक्रमण हटाया गया। नगर निगम टीम बेसमेंट से संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। सरकारी वकील ने कोर्ट में जानकारी दी कि अधिकारी जांच कर रहे हैं। करीब 75 संस्थानों को नोटिस दिए जा चुके हैं। 35 को बंद किया गया है। 25 को सील कर किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर घटना की जांच के लिए कई टीमें गठित कर दी थीं। हालांकि, 3 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।
आतिशी
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हादसे पर दिल्ली सरकार का क्या रुख है?
हादसे के बाद ही दिल्ली सरकार ने जानकारी दी थी कि इस त्रासदी की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। 31 जुलाई को दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और छात्रों के साथ बैठकर उनकी सभी मांगों को नोट किया। उन्होंने लाइब्रेरी फीस माफ करने और पुराने राजिंदर नगर, मुखर्जी नगर और लक्ष्मी नगर में कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण करने सहित अतिरिक्त सिफारिशें भी कीं। उन्होंने कहा कि पुराने राजिंदर नगर में एक शिकायत निवारण बोर्ड स्थापित किया जाएगा, जो पानी, बिजली या किसी अन्य समस्या से संबंधित छात्रों की सभी शिकायतों का समाधान करेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों और अधिकारियों के एक पैनल को कोचिंग सेंटरों पर मसौदा कानून को अंतिम रूप देने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।
दिल्ली सरकार कोचिंग सेंटरों को नियमित करने के लिए नया कानून भी लेकर आ रही है। शिक्षा मंत्री आतिशी ने इसकी घोषणा कर दी है। आतिशी ने बताया कि जैसे प्राइवेट स्कूल को एक कानून के तहत रेगुलेट किया जाता है, प्राइवेट अस्पतालों को कानून के तहत रेगुलेट किया जाता है वैसे ही कोचिंग इंस्टिट्यूट को रेगुलेट करने के लिए दिल्ली सरकार कानून लाएगी।
इसके अलावा, दिल्ली की मेयर शेली ओबेरॉय ने प्रस्ताव दिया है कि घटना में जान गंवाने वाले उम्मीदवारों के नाम पर राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर, पटेल नगर और बेर सराय में चार पुस्तकालय स्थापित किए जाएं।
हादसे पर कोचिंग संचालकों का क्या कहना है?
राव अकादमी ने 31 जुलाई को दुखद घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया। अकादमी ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है। अकादमी ने इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान करने का आग्रह किया। दृष्टि द विजन के डायरेक्टर विकास दिव्यकीर्ति ने सोशल मीडिया पर कोचिंग संस्थान की बेसमेंट में हुई घटना पर अपना पक्ष रखा। दिव्यकीर्ति ने कहा कि विद्यार्थियों का रोष न्यायसंगत है। अच्छा होगा कि सरकार कोचिंग संस्थाओं के लिए निश्चित दिशा-निर्देश लागू करे। कीर्ति का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी तो समाधान मिल सकेगा।
इसके अलावा, विकास दिव्यकीर्ति ने कोचिंग हादसे में जान गंवाने वाले तीनों छात्रों के परिवार को 10-10 लाख वित्तीय सहायता और राऊ के मौजूदा आईएएस की तैयारी कर रहे छात्रों मुफ्त कोचिंग देने की घोषणा की है। हादसे पर अन्य कोचिंग संचालकों की भी मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है।