दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों पर ई बसों की संख्या बढ़ाकर वायु प्रदूषण को कम करने की योजना पर काम कर रही है। सरकार की योजना है कि इस साल के अंत तक बैटरी चलित ई बसों की संख्या बढ़ाकर 5000 कर दी जाए। इससे लोगों को आवागमन के लिए सस्ता-सुलभ साधन उपलब्ध होगा, साथ ही इससे वायु प्रदूषण से निपटने में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवी बसों की एक खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर चुके हैं। इस महीने 150 नई ई बसों को सड़कों पर उतारने की योजना है।
एक नई पहल के अंतर्गत दिल्ली के उन गैर परंपरागत रूट्स पर भी ई बसें चलाई जा रही हैं जहां से अब तक डीटीसी बसों का संचालन नहीं होता था। जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए नए रूट्स की पहचान कर उन पर बसें चलाई जा रही हैं। 109 नए रूट्स की पहचान की गई है। इन पर भी देवी बसें चलाने की तैयारी है।
डीटीसी को घाटे से उबारने की चुनौती
डीटीसी बसों का संचालन दिल्ली सरकार के लिए हमेशा से महंगा सौदा साबित हुआ है। शीला दीक्षित, अरविंद केजरीवाल से लेकर आतिशी मारलेना तक डीटीसी बसों का संचालन हमेशा घाटे में ही रहा है। अरविंद केजरीवाल सरकार में कई वर्गों को मुफ्त आवागमन की सुविधा देने से यह घाटा और अधिक बढ़ता गया।
लेकिन अब दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार इसे लाभ में लाने की रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है। सरकार मुफ्त संचालन की सुविधा जरूरतमंद वर्गों को देना जारी रखेगी। इसके लिए महिलाओं-बुजुर्गों को विशेष कार्ड दिए जाने की तैयारी है। लेकिन घाटे को पूरा करने के लिए डीटीसी बसों पर निजी संस्थानों-कंपनियों के प्रचार के माध्यम से पैसा उगाहने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के व्यावसायिक दृष्टिकोण को अपनाकर डीटीसी को घाटे से उबारा जा सकता है।
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ज्यादा पैसा कमाने के लिए डीटीसी बसों की पार्किंग, टर्मिनल के खुले और बड़े स्थानों का भी व्यावसायिक उपयोग किये जा की योजना पर विचार चल रहा है। कुछ स्थानों पर छोटे शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित कर उनसे पैसा कमाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा था। दिल्ली सरकार ने एक वर्ष के अंदर डीटीसी को घाटे से उबारते हुए उसे लाभ की स्थिति में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।