2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराकर कभी अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की थी। तब कुछ धड़ों में केजरीवाल को जायंट किलर की उपाधि तक दी जाने लगी थी। वजह थी कांग्रेस और सीएम शीला दीक्षित का गढ़ करार दी जाने वाली नई दिल्ली विधानसभा सीट, जिस पर चुनाव लड़ने के फैसले ने ही केजरीवाल की अलग छवि गढ़ दी। हालांकि, राजनीति की यही खास बात है कि इसमें कुछ भी स्थायी नहीं होता और शिकार करने वाले अकसर शिकार बन जाया करते हैं।
2025 में नई दिल्ली सीट पर यही कहावत चरितार्थ हुई। 12 साल में नई दिल्ली से तीन बार जीतकर इस सीट को अपना किला बना चुके अरविंद केजरीवाल को चौथी बार की जंग में इस सीट पर हार मिली। वह भी ऐसे चेहरे के सामने, जिसने अब तक के अपने सियासी करियर में हार का मुंह नहीं देखा है। यह चेहरा है- प्रवेश वर्मा का, जो कि 2013 में चुनाव जीतने के बाद 2025 में दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उतरे और एक बार फिर जीत हासिल की।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर प्रवेश वर्मा कौन हैं? उनका राजनीतिक करियर अब तक कैसा रहा है? लोकसभा सीट छोड़कर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरने तक की उनकी कहानी क्या है? इसके अलावा नई दिल्ली सीट में केजरीवाल के मुकाबले में प्रवेश वर्मा ने जीत की पटकथा कैसे लिखी? आइये जानते हैं...