सीबीआई ने फेसलेस मूल्यांकन के लंबित मामलों की जानकारी साझा करने में एक आईआरएस अधिकारी, छह सीए व आयकर विभाग के अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने देशभर में 18 जगहों पर छापे मारे। सीबीआई का आरोप है कि आरोपी फेसलेस मूल्यांकन प्रणाली को दरकिनार कर चार्टर्ड एकाउंटेंट के एक समूह के साथ लंबित मूल्यांकन पर संवेदनशील डाटा साझा कर रहे थे।
सीबीआई ने नई दिल्ली के झंडेवालान कार्यालय में तैनात आयकर उपायुक्त विजयेंद्र आर, सीए दिनेश कुमार अग्रवाल, आयकर निरीक्षक दिनेश कुमार वर्मा और बिनायक शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनके अलावा सीए शिवरतन मंगेलाल सिंगरोदिया, भावेश पुरुषोत्तमभाई रखोलिया, प्रतीक लेनिन, मलिक गिरीश आनंद और सुशील कुमार के भी नाम हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने करदाताओं और अर्थव्यवस्था के लाभ के लिए प्रत्यक्ष कर प्रशासन में भविष्योन्मुखी सुधारों की एक शृंखला शुरू की है।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि एजेंसी ने दिल्ली, मुंबई, ठाणे, पश्चिम चंपारण (बिहार), बंगलूरू, कोट्टायम (केरल) में छापा मारा। सीबीआई ने आपत्तिजनक दस्तावेज, अनुचित रिश्वत के भुगतान के साक्ष्य और कुछ डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। मूल्यांकन की ‘फेसलेस योजना’ एक ऐसा ही सुधार है, जहां करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच कोई मानवीय संपर्क नहीं है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आयकर विभाग ने पिछले साल अग्रवाल के यहां तलाशी ली थी और उनके फोन की जांच के दौरान पता चला कि चार्टर्ड अकाउंटेंट का एक नेटवर्क था, जो अनुचित लाभ लेकर फेसलेस असेसमेंट सिस्टम में काम करने वाले असेसमेंट अधिकारियों की पहचान उजागर कर रहा था। जांच में पाया गया कि अग्रवाल ने या तो स्वयं या अन्य सीए और विभिन्न राज्यों में नोडल अधिकारियों के माध्यम से करदाताओं से संपर्क किया। उन्हें एक निश्चित आर्थिक लाभ के बदले में उनके पक्ष में लंबित मामले को निपटाने की पेशकश की। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि आरोप है कि उन्होंने सरकार द्वारा शुरू की गई 'फेसलेस असेसमेंट स्कीम' के उद्देश्य को चुनौती देने और उसे विफल करने की कोशिश की।