विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में ग्रीस के समकक्ष जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने व्यापार, निवेश और संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। जयशंकर ने गेरापेट्रिटिस के नेतृत्व में ग्रीस के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और भारत व ग्रीस के बढ़ते संबंधों पर फोकस किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं लगातार हो रही हैं।
जयशंकर ने कहा, पिछले साल से हमारे संबंधों में काफी उछाल आया। ऐसे बहुत कम देशों के बीच संबंध हैं, जहां प्रधानमंत्री स्तर के दौरों का आदान-प्रदान इतनी तेजी से हुआ हो। हमारे पास एक मजबूत राजनीतिक समर्थन और लोगों के बीच समझ है। हम अधिक व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और संपर्क पर मिलकर काम करना चाहते हैं।
वहीं, गेरापेट्रिटिस ने ग्रीस की ओर से पर्यटन, संस्कृति और व्यापार सहित सभी द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में भारत और ग्रीस के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफी वृद्धि हुई है। हम इन संबंधों को हर दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसमें पर्यटन, संस्कृति और व्यापार शामिल हैं। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्य होने के नाते भारत की आवाज को संयुक्त राष्ट्र में उठाना चाहेंगे। गेरापेट्रिटिस ग्रीस और भारत के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली के दौरे पर हैं।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को गेरापेट्रिटिस का स्वागत करते हुए कहा, ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस की भारत की आधिकारिक यात्रा पर हार्दिक स्वागत है। उनकी यात्रा भारत-ग्रीस संबंधों को और मजबूत करेगी और हमारी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देगी।
भारत और ग्रीस के ऐतिहासिक रूप से गर्मजोशी और सहयोग वाले संबंध रहे हैं और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक-दूसरे का समर्थन किया है। इनमें कश्मीर और साइप्रस का मुद्दा भी शामिल है। ग्रीस ने जम्मू और कश्मीर में हालिया घटनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं की, जो भारत की चिंताओं के अनुरूप है। इसके अलावा, ग्रीस ने यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।
वहीं, ग्रीस में भारतीय समुदाय की आबादी समय के साथ बढ़ती गई है। 2011 की ग्रीस की जनगणना के मुताबिक, वहां 11,333 भारतीय नागरिक थे और वर्तमान में यह आंकड़ा 13,000 से 14,000 के बीच हो सकता है। अधिकांश भारतीय पंजाबी मूल के हैं, जो खेती और निर्माण के क्षेत्रों में काम करते है।