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Timarpur Assembly Seat: चौथी जीत का रिकॉर्ड बनाएगी आप या किसी और चुनेगी तिमारपुर की जनता, ऐसा है इसका इतिहास

Fri, 17 Jan 2025 06:12 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Timarpur Seat: दिल्ली में चुनावी तारीखों का एलान होने के साथ ही पार्टियों का प्रचार जोरों शोरों से नजर आ रहा है। ऐसे में तिमारपुर सीट का क्या हाल है चलिए जानते हैं। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनावों का पारा चढ़ चुका है। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। आप, भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी तय हो चुके हैं। शुक्रवार को नामांकन की आखिरी तारीख है। कई सीटों पर प्रत्याशियों ने नामांकन भी कर दिया है। कई सीटें ऐसी भी हैं जहां से बड़े चेहरों का टिकट कटा है तो कई बड़े नेताओं की सीट को बदला गया है। ऐसी ही एक सीट है तिमारपुर, ये सीट चर्चा में इसलिए है क्योंकि यहां से आप के बड़े नेता दिलीप पांडे चुनाव जीतते आ रहे थे। लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है।  

दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में तिमारपुर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी

दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

कैसा रहा तिमारपुर का चुनावी इतिहास
तिमारपुर में पहली बार चुनाव 1972 में चुनाव हुए थे। जिसमें कांग्रेस के अमर नाथ मल्होत्रा को जीत मिली थी। उन्हें 14,456 वोट मिले थे। वहीं भारतीय जन संघ के उत्तम प्रकाश बंसल को 11,165 वोट मिले थे। जीत का अंतर 3291 वोट का रहा था। दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद 1993 में फिर से चुनाव हुए जिसमें भाजपा के राजेंद्र गुप्ता ने कांग्रेस के हरि शंकर गुप्ता को 5056 वोटों से हराया था। 

दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1998: कांग्रेस का सीट पर कब्जा 
1998 में तिमारपुर सीट पर दो नए चेहरों से बीच मुकाबला हुआ। कांग्रेस के जगदीश आनंद ने भाजपा रघुवंश सिंघल को 7,852 वोटों से हराया था। कुल 16 उम्मीदवारों में से 14 की जमानत जब्त हो गई थी। कांग्रेस उम्मीदवार जगदीश आनंद को 27411 वोट मिले थे। वहीं, रघुवंश सिंघल को 19,559 वोट से संतोष करना पड़ा। 

2003: कांग्रेस का कब्जा बरकरार
2003 के विधानसभा चुनाव में तिमारपुर सीट पर एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच हुआ। भाजपा ने 1993 में यहां विधायक रह चुके राजेद्र गुप्ता को मैदान में उतारा। वहीं, कांग्रेस ने सुरिंदर पाल सिंह को टिकट दिया। सुरिंदर पाल सिंह ने भाजपा के राजेंद्र गुप्ता को 5,974 वोटों से हराकर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखा। 

2008: लगातार तीसरी बार कांग्रेस का कब्जा
2008 में हुए परिसीमन के बाद तिमारपुर सीट एक नए स्वरूप में सामने आई। इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के सुरिंदर पाल सिंह ने एक बार फिर जीत दर्ज की। सिंह लगातार दूसरी बार विधायक बने।  वहीं, कांग्रेस को इस सीट पर लगातार तीसरी बार जीत मिली। सुरिंदर पाल सिंह ने भाजपा के सूर्य प्रकाश खत्री को 2,413 वोटों से हराया।  

2013: आप को मिली पहली जीत
2013 में दिल्ली के चुनावों की तस्वीर बदल गई और यह मुकाबला दो पार्टियों के बीच नहीं रहा बल्कि त्रिकोणीय हो गया। इस बार दिल्ली में एक नई पार्टी चुनावी मैदान में थी। भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी को इन चुनावों में काफी अच्छी जीत मिली थी। 

तिमारपुर पर आप के हरीश खन्ना को जीत मिली। भाजपा और कांग्रेस दोनों को हार का सामना करना पड़ा। हरीश खन्ना में भाजपा के रजनी अब्बी को 3,383 वोटों से हराया हरीश खन्ना को 39,650 वोट मिले। वहीं, रजनी अब्बी को 36,267 वोट मिले। 

2015: आप ने कायम रखा वर्चस्व
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो केजरीवाल  ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

2015 में तिमारपुर सीट पर आप और भाजपा के बीच मुकाबला हुआ। इसमें आप ने 20,647 वोटों के अंतर से भाजपा को मात दी। आप के पंकज पुष्कर ने 64,477 वोट हासिल किए। वहीं, भाजपा की रजनी अब्बी ने 43,830 वोट ही मिले।


 

दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2020: आप के दिलीप पांडे की जीत 
दिलीप पांडे आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरों में शामिल हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें तिमारपुर से टिकट दिया। इस सीट पर उन्होंने आप को लगातार तीसरी जीत दिलाई। दिलीप पांडे  24,144 वोट से जीते। भाजपा की तरफ से इस बार मैदान में दो बार से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े सुरिंदर पाल सिंह थे। दिलीप पांडे को 71,432 वोट मिले। भाजपा के सुरिंदर पाल सिंह को 47,288 वोट मिले। 
 


 
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अबकी बार क्या है समीकरण
2025 के विधानसभा चुनाव के लिए तिमारपुर सीट से कांग्रेस से दो बार विधायक रह चुके और फिर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके और अब में आप में आने वाले सुरिंदर पाल सिंह मैदान में हैं। आप ने दिलीप पांडे की जगह उन्हें उतारा है।  हालांकि, दिलीप पांडे ने उम्मीदवार का एलान हो ने से पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह आगामी दिल्ली चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि अब पार्टी के भीतर रहते हुए कुछ और करने का समय आ गया है। भाजपा ने यहां से सूर्य प्रकाश खत्री को टिकट दिया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से लोकेंद्र चौधरी मैदान में हैं। 

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