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Rohini Assembly Seat: भाजपा लगाएगी हैट्रिक या रोहिणी की जनता किसी और को चुनेगी? ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास

Sat, 11 Jan 2025 06:06 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Rohini Assembly constituency: रोहिणी विधानसभा सीट 2008 में अस्तित्व में आई। अब तक इस सीट पर चार बार चुनाव हो चुका है। तीन बार भाजपा तो एक बार आम आदमी पार्टी को यहां से जीत मिली है। आइये इस सीट से जीते सभी चेहरों के बारे में जानते हैं... 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान हो चुका है। दिल्ली में 5 फरवरी को विधानसभी के चुनाव होने है। सभी पार्टियां चुनावों की तैयारियों में लग चुकी है। इस कड़ी में हम आपको दिल्ली की सभी सीटों का हाल बता रहे हैं। आज रोहिणी विधानसभा सीट की बात करेंगे। रोहिणी विधानसभा सीट का  इतिहास बहुत पुराना नहीं है। क्योंकि 2008 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व नें आई। 

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आइए जानते है कि बीते वर्षों में दिल्ली की इस विधानसभा की क्या स्थिति रही है? पिछली बार यहां से कौन जीता? इस बार क्या स्थिति है?

दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली?
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधान सभा 17 मार्च, 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद, दिल्ली 1 नवंबर, 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। जिसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

महानगर परिषद की व्यवस्था में कई कमियां थी। जिसके बाद विधानसभा की मांग उठती थी। 24 दिसंबर, 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर, 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभी को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 

2008 में भाजपा को सीट पर जीत
2008 में हुए परिसीमन के बाद रोहिणी विधानसभा सीट अस्तिव में आई।  इसके बाद 2008 में पहली बार इस सीट के लिए चुनाव हुए। 2008 के इस चुनाव में यहां से कुल सात उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 89192 लोगों ने मतदान किया था। भाजपा के जय भगवान अग्रवाल ने यहां से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के विजेन्द्र जिंदल दूसरे नंबर पर रहे। जय भगवान अग्रवाल को 55793 वोट मिले। कांग्रेस के विजेन्द्र जिंदल को 30019 वोट से संतोष करना पड़ा। तरह अग्रवाल को 25774 वोट से जीत मिली। बसपा के ओपी मल्होत्रा 2293 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। हालांकि उनकी जमानत जब्त हो गई। 

दिल्ली चुनावी 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013 में आप को मिली पहली और आखिरी जीत
2013 में दूसरी बार रोहणी सीट पर चुनाव हुए। इस चुनाव में रोहिणी सीट से आम आदमी पार्टी को जीत मिली। आम आदमी पार्टी के राजेश गर्ग ने 2008 में यहां से जीते भाजपा के जय भगवान अग्रवाल को मात दी।  आप के राजेश गर्ग ने 47890 वोट मिले वहीं, जय भगवान अग्रवाल को 46018 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 1872 वोट का था।  

2015 में भाजपा के विजेंद्र गुप्ता जीते
2015 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली। बची तीन सीटें भाजपा के खाते में गईं। जिन तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली उनमें रोहिणी विधानसभा सीट भी शामिल थी। 2013 में रोहिणी सीट पर जीती आम आदमी पार्टी 2015 में प्रचंड जीत के बाद भी रोहिणी सीट बरकरार नहीं रख सकी। यहां से भाजपा ने एक बार फिर से जीत दर्ज की। भाजपा के विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के सीएल गुप्ता को 5,367 वोट से हरा दिया। विजेंद्र गुप्ता भाजपा दिल्ली इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। भाजपा के विजेंद्र गुप्ता को इस चुनाव में 59,866 वोट मिले, वहीं आप के सीएल गुप्ता को 54499 वोट से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस के सुखबीर शर्मा को केवल 3347 वोट मिले। 

दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2020 में विजेंद्र गुप्ता की दूसरी जीत
2020 में भी रोहिणी सीट पर भाजपा के विजेंद्र गुप्ता ने जीत दर्ज करने में सफल रहे। इस चुनाव में उन्हें 2015 से भी ज्यादा 62,174 वोट मिले। वहीं, आम आदमी पार्टी के राजेश नामा बंसीवाला को 49,526 वोट मिले। गुप्ता 12,648 वोट से जीतने में सफल रहे। 

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अबकी बार क्या है समीकरण
भाजपा ने इस बार भी विजेन्द्र गुप्ता को ही रोहिणी से मैदान में उतारा है। गुप्ता रोहिणी से तीन बार के पार्षद भी रह चुके हैं। दो बार से यहां के विधायक चुने जा रहे हैं।  आप ने रोहिणी से प्रदीप मित्तल को मैदान में उतारा है। आम आदमी पार्टी के रोहिणी विधानसभा क्षेत्र से प्रदीप मित्तल को टिकट दिया है। प्रदीप मित्तल दिल्ली नगर निगम में वार्ड 21, रोहिणी ए के पार्षद हैं। कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई नाम इस सीट पर तय नहीं किया गया है। इस चुनाव  में भाजपा को जीतती है तो यहां से जीत की हैट्रिक लगाएगी। वहीं, आम आदमी पार्टी को अगर जीत मिलेगी तो 12 साल बाद उसकी यहां वापसी होगी। जबकि, कांग्रेस समेत किसी अन्य उम्मीदवार के जीतने पर ये रोहिणी में उसकी पहली जीत होगी। नतीजा क्या होगा ये 5 फरवरी को तय होगा और इसका पता 8 फरवरी को चलेगा जब नतीजे घोषित होंगे। 

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