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Rithala Assembly Seat: रिठाला में आप की लगेगी हैट्रिक या बदल जाएगा नतीजा, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास

Mon, 20 Jan 2025 07:30 PM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

Rithala Seat: रिठाला सीट दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से एक है। यह सीट 2008 में अस्तित्व में आई। इस सीट पर अब तक हुए चार चुनावों में से दो बार भाजपा और दो बार आप को जीत मिली है।  

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार जारी है। आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस चुनाव में हर पार्टी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रही है। किसकी रेवड़ी में सबसे ज्यादा मिठास रही ये 8 फरवरी को पता चलेगा। जब नतीजे आएंगे। इन नतीजों में कुछ सीटों पर सबकी नजर रहेगी। हर सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पार्टियां अपने समीकरण सही करने में जुटी हैं। रिठाला सीट भी दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में शामिल है। इस बार यहां से आप की तरफ से मौजूदा विधायक मोहिंदर गोयल को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने कुलवंत राणा तो कांग्रेस ने सुशांत मिश्रा को मैदान में उतारा है।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में रिठाला में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

सबसे पहले दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

कैसे रहा रिठाला में चुनावों का इतिहास?
दिल्ली विधानसभा के गठन के बाद 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। उस वक्त रिठाला नाम से कोई भी विधानसभा सीट अस्तित्व में नहीं थी। 2008 में हुए परिसीमन के बाद रिठाला सीट अस्तित्व में आई। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच टक्कार थी। मुकाबला भाजपा के पक्ष में गया था। भाजपा के कुलवंत राणा ने यहां से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 64,474 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार ने कांग्रेस के शंभू दयाल शर्मा को 26,346 वोट से शिकस्त दी। कांग्रेस उम्मीदवार को कुल 38,128 वोट मिले।  

दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013: भाजपा के कुलवंत राणा फिर मिली जीक 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। इस बार सीट पर मुकाबला कांग्रेस और भाजपा का नहीं बल्कि आप और भाजपा के बीच हुआ। कांग्रेस यहां अपनी जमानत भी नहीं बचा सकी। 2008 में यहां से जीते कुलवंत राणा एक बार फिर जीतने में सफल रहे। भाजपा उम्मीदवार को 73,961 वोट मिले। कुलवंत राणा ने आप के हरीश अवस्थी को 25,826 वोट से शिकस्त दी।आप के हरीश अवस्थी को 48,135 वोट मिले।

2015: आप को मिली पहली जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।

इस सीट पर 2015 में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। भाजपा की तरफ से दो बार से लगातार विधायक चुने जा रहे कुलवंत राणा को मैदान में उतारा गया था। आप के मोहिंदर गोयल को मैदान में उतारा गया। लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुके कुलवंत राणा रिठाला से हैट्रिक नहीं लगा सके। उन्हें मोहिंदर गोयल से हार मिली। आप के गोयल ने भाजपा उम्मीदवार को  29251 वोट से हरा दिया।  आप उम्मीदवार को 93,470 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी को 64,219 वोट से संतोष करना पड़ा। 


 

2020: आप के मोहिंदर गोयल दूसरी बार चुने गए

2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। रिठाला के नतीजों की बात करें तो यहां से आप की तरफ से मौजूदा विधायक मोहिंदर गोयल को ही फिर से जीत मिली। आप नेता ने भाजपा मनीष चौधरी को 13,873 वोट से पटखनी दी थी। आप को 87,940 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रही भाजपा को 74,067 वोट मिले।
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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

अबकी बार कैसे है समीकरण? 
इस बार आम आदमी पार्टी ने रिठाला सीट पर मौजूदा विधायक मोहिंदर गोयल को टिकट दिया था। वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर सुशांत मिश्रा को टिकट दिया है। सुशांत मिश्रा 2017 में कांग्रेस के टिकट पर रिठाला से पार्षद का चुनाव भी लड़ चुकें हैं। भाजपा ने यहां से दो बार विधायक रहे कुलवंत राणा को टिकट दिया है। 

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