दिल्ली कांग्रेस के वार रुम का उद्घाटन करने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने भी आप के साथ गठबंधन की किसी संभावना से स्पष्ट इनकार कर दिया।
दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को अपने साथ लेने की हर संभव कोशिश की थी। दिल्ली प्रभारी पीसी चाको इसके पूरे पक्ष में थे और उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से इसके संदर्भ में बात भी कर ली थी। लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित इस फैसले के सख्त खिलाफ थीं।
उनकी राय थी कि कांग्रेस को दिल्ली में दुबारा मजबूती के साथ वापस आने के लिए अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए चाहे, इसका परिणाम कुछ भी क्यों न हो। आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने शीला दीक्षित की राय के साथ सहमति जताई और दिल्ली में आप और कांग्रेस के बीच कोई गठबंधन नहीं हो सका।
माना जाता है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का वोट बैंक कमोबेस एक ही है। मुसलमानों के साथ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाला वोटर परंपरागत रुप से कांग्रेस को वोट दिया करता था। लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी ने लोगों के जनमानस में एक नई उम्मीद पैदा की, जिसमें कांग्रेस का यह वोट बैंक कांग्रेस से खिसककर आप के साथ चला गया।
एक राय है कि अगर इस वोट बैंक में बंटवारा होता है, तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है और सत्ता की उसकी राह आसान हो सकती है। इस संभावना को रोकने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही दलों में इस तरह के लोग हैं, जो यह गठबंधन करने के पक्ष में हैं।