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पुराने बयान से पलटे पीसी चाको, कहा- आम आदमी पार्टी के साथ कोई समझौता नहीं करेगी कांग्रेस

Fri, 03 Jan 2020 06:59 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • चुनाव बाद आप के साथ गठबंधन की खबरों से किया इनकार
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PC Chacko - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी के प्रभारी पीसी चाको ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से गठबंधन की किसी संभावना से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस अकेले दम पर पूरी ताकत के साथ उतरेगी और जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव पूर्व या बाद में उनके आम आदमी पार्टी के साथ जाने की कोई संभावना नहीं है। इसके पहले एक बयान में उन्होंने चुनाव बाद आप के साथ गठबंधन की संभावना जताई थी।

 

दिल्ली कांग्रेस के वार रुम का उद्घाटन करने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने भी आप के साथ गठबंधन की किसी संभावना से स्पष्ट इनकार कर दिया।

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पीसी चाको ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली में लोगों का आम आदमी पार्टी से मोहभंग हुआ है। लोकसभा चुनाव इस बात का प्रमाण हैं कि जनता ने अब आप को खारिज कर दिया है और हमारा वोट हमारे पास वापस आया है। हम अपने 15 साल के (शीला दीक्षित) शासनकाल के बल पर जनता से समर्थन मांगेंगे।

कांग्रेस उन्हीं राज्यों में भाजपा को रोकने में कामयाब हो रही है, जहां वह अन्य विपक्षी दलों को साथ ले रही है। ऐसे में क्या उसे दिल्ली में भी ऐसा प्रयोग नहीं करना चाहिए? अमर उजाला के इस सवाल पर पीसी चाको ने कहा कि हर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां देखकर पार्टी इस तरह के फैसले लेती है। झारखंड और महाराष्ट्र की तुलना दिल्ली से नहीं की जा सकती।
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सिर्फ एक चुनाव पूर्व कांग्रेस यहां लगातार 15 साल सत्ता में रही है और यहां का सबसे प्रमुख राजनीतिक दल है। जनता के सामने नए विकल्प (आम आदमी पार्टी) ने उसे एक चुनाव के लिए नुकसान पहुंचाया है। लेकिन इससे कांग्रेस की दिल्ली की जमीन पर पकड़ कम नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि हम इस चुनाव में अपने बल पर जीत हासिल करेंगे।

क्यों अहम है चाको का ये बयान

दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को अपने साथ लेने की हर संभव कोशिश की थी। दिल्ली प्रभारी पीसी चाको इसके पूरे पक्ष में थे और उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से इसके संदर्भ में बात भी कर ली थी। लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित इस फैसले के सख्त खिलाफ थीं।

उनकी राय थी कि कांग्रेस को दिल्ली में दुबारा मजबूती के साथ वापस आने के लिए अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए चाहे, इसका परिणाम कुछ भी क्यों न हो। आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने शीला दीक्षित की राय के साथ सहमति जताई और दिल्ली में आप और कांग्रेस के बीच कोई गठबंधन नहीं हो सका।

वोट बैंक लगभग एक

माना जाता है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का वोट बैंक कमोबेस एक ही है। मुसलमानों के साथ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाला वोटर परंपरागत रुप से कांग्रेस को वोट दिया करता था। लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी ने लोगों के जनमानस में एक नई उम्मीद पैदा की, जिसमें कांग्रेस का यह वोट बैंक कांग्रेस से खिसककर आप के साथ चला गया।

एक राय है कि अगर इस वोट बैंक में बंटवारा होता है, तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है और सत्ता की उसकी राह आसान हो सकती है। इस संभावना को रोकने के लिए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही दलों में इस तरह के लोग हैं, जो यह गठबंधन करने के पक्ष में हैं।        

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