भारतीय वायुसेना में नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही बहुत ज्यादा देरी से वायुसेना को नुकसान हो रहा है। इसमें तेजस विमान भी शामिल हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शनिवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या कम होती जा रही है। वहीं, सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में हवाई ताकत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इस वजह से विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी से वायुसेना को नुकसान हो रहा है। वायुसेना प्रमुख ने 94वें वायुसेना दिवस से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों तक वायुसेना को हर साल कम से कम 36 से 40 लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है। इससे विमानों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश में बने तेजस मार्क-1ए विमान और एमएफआरए कार्यक्रम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू विमानों के वायुसेना में शामिल होने से स्थिति बेहतर होगी।
चीन के साथ पाकिस्तान की साझेदारी पर क्या कहा?
एयर चीफ मार्शल सिंह ने पाकिस्तान और चीन के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर हो रहे सहयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, यह चिंता की बात है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत के पास भी अपनी क्षमताएं हैं। किसी एक विमान या हथियार के प्लेटफॉर्म से ही सब कुछ तय नहीं होता।
वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के उपायों पर उन्होंने कहा कि सरकार इस वित्तीय वर्ष में एमएफआरए सौदे को अंतिम रूप देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है, तो ऐसा हो सकता है।
114 राफेल विमानों की खरीद का प्रस्ताव
भारत ने फरवरी में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। यह खरीद फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार समझौते के तहत होनी है। यह फैसला भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए लिया गया है। मूल योजना सामने आने के करीब दो दशक बाद इसे मंजूरी मिली है। इस सौदे की कीमत को लेकर बातचीत चल रही है। परियोजना से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अगर बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ी, तो इस वित्तीय वर्ष में एमएफआरए समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, यही मेरी उम्मीद है। लेकिन यह दोनों पक्षों की प्रक्रिया है। उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए यह बात कही।
तेजस की डिलीवरी में देरी पर क्या कहा?
वायुसेना प्रमुख ने तेजस मार्क-1ए विमानों की आपूर्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, कुछ अतिरिक्त देरी हुई है। इसमें कोई शक नहीं कि इससे हमें नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि वायुसेना को हर साल दो लड़ाकू स्क्वाड्रन शामिल करने की जरूरत है। इसका मतलब है कि हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमान बनाए जाने चाहिए और वायुसेना में शामिल किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे वायुसेना के मौजूदा 30 लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या और नीचे जाने से रोकी जा सकेगी। इसके बाद इसे 42 स्क्वाड्रनों के लक्ष्य की ओर बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वास्तव में वायुसेना को इससे भी ज्यादा लड़ाकू विमानों की जरूरत है।
83 तेजस विमानों का सौदा
फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ करीब 48,000 करोड़ रुपये का समझौता किया था। इस समझौते के तहत वायुसेना के लिए 83 तेजस एमके-1ए विमान खरीदे जाने थे। इन विमानों की पहली खेप मार्च 2024 में मिलनी थी। लेकिन अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है।
वायुसेना इन लड़ाकू विमानों को शामिल करना चाहती है। इसकी वजह यह है कि उसके लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या काफी कम हो गई है। वायुसेना के लिए आधिकारिक तौर पर 42 लड़ाकू स्क्वाड्रन की मंजूरी है।
97 और तेजस विमानों का दूसरा सौदा
पिछले साल सितंबर में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ एक और समझौता किया था। यह सौदा 62,370 करोड़ रुपये का था। इसके तहत वायुसेना के लिए 97 तेजस एमके-1ए हल्के लड़ाकू विमान खरीदे जाने हैं। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना तेजस मार्क-1ए विमानों का इंतजार कर रही है। इसके अलावा वह एमएफआरए कार्यक्रम के तहत आने वाले विमानों का भी इंतजार कर रही है।