संसदीय समिति अब जजों की नियुक्तियों में हो रही देरी की वजहों का पता लगाएगी। इस मसले पर समिति कानून मंत्रालय से सवाल जवाब भी करेगी। दरअसल, संसदीय बुलेटिन में कहा गया है कि कार्मिक, जन शिकायतों, कानून और न्याय मामलों की संसदीय समिति सुप्रीम कोर्ट और देश के हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति में हो रही देरी के मुद्दे पर विचार करेगी।
कानून मंत्रालय के अधिकारी इस मुद्दे पर अपनी पक्ष रखने के लिए संसदीय समिति के सदस्यों (सांसद) के सामने पेश होंगे। जजों की नियुक्तियों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। हाल में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने सरकार द्वारा नियुक्ति में हो रही देरी का मसला उठाया था। एक सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि 1987 में कानून आयोग ने दस लाख लोगों पर पचास जज होने की सिफारिश की थी।
मगर तब से अब तक इस संबंध में कुछ नहीं हुआ है। 31, दिसंबर, 2015 तक देश की निचली अदालतों में जजों के 4,432 पद खाली हैं, जबकि 24 हाई कोर्ट में 450 के करीब जजों की कमी है। वहीं देशभर में तीन करोड़ के करीबी मुकदमे लंबित पड़े हैं।