रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक के 39वें कमांडर सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस समारोह में उन्होंने कहा कि भारत इस समय आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और डकैती जैसी बड़ी समुद्री चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारतीय तटरक्षक के 39वें कमांडर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में रक्षामंत्री ने कहा कि बढ़ते क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार के कारण कई नई चुनौतियों पैदा हुई हैं। भू-राजनीतिक तनाव और सामरिक हितों के बीच टकराव के कारण भी पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां पैदा हुईं हैं।
इस समारोह में बोलते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति है। जिसके नाते नियम-आधारित, शांतिपूर्ण और स्थिर वातावरण बनाने में हमारी स्पष्ट रुचि है। ऐसे में भारतीय तटरक्षक की भूमिका बड़ी हो जाती है। 39वां कमांडर सम्मेलन का आयोजन तीन दिनों तक होगा।
मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने को लेकर रक्षामंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि चाहे देश की रक्षा का मामला हो या अर्थवस्था का, हर मोर्चे पर भारत की स्थिति पहले से काफ़ी मज़बूत हुई है। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं और इसका सबसे अधिक असर रक्षा क्षेत्र में दिखाई दे रहा है।आज भारत प्रमुख रक्षा सामग्री निर्यातक देशों में गिना जाता है।
तकनीक के साथ बदल रहा जंग का प्रारूप, हमें तैयार रहना होगा : चौधरी
वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी ने सोमवार को कहा कि तकनीक के साथ जंग का प्रारूप बदलता जा रहा है। अब सैनिकों और हथियारों के साथ-साथ हमें अन्य मोर्चों पर भी बड़े बदलाव के साथ अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। देश की सुरक्षा व्यवस्था में बहुआयामी बदलाव जरूरी हैं।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की 142वीं पासिंग आउट परेड में चौधरी ने कहा, देश की सुरक्षा व्यवस्था के मौजूदा खतरों व चुनौतियों का दायरा बढ़ा है। हमें इनसे निपटने के लिए कम समय के भीतर बड़े युद्ध के लिए तैयार होने की क्षमता विकसित करनी होगी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी बदलाव लाने होंगे। चौधरी ने कैडेट्स से कहा, हमें गर्व है कि आज भारतीय वायुसेना दुनिया की तीसरी शीर्ष वायुसेना है। आप इस पेशे से तब जुड़ रहे हैं जब देश में तकनीकी परिवर्तन का दौर है। हमारी तीनों सैन्य सेवाओं ने तेजी से अगली पीढ़ी के जंगी हथियारों में निवेश किया है। आप इन आधुनिक हथियारों को इस्तेमाल करेंगे। इसलिए जरूरी है कि आप इनको लेकर दक्ष बनें और इसके लिए कठिन ट्रेनिंग, दृष्टिकोण की जरूरत होगी। जैसे आज दुनिया परंपरागत युद्ध से अलग नई तकनीक को शामिल कर रही है। यह हम सभी के लिए जरूरी है कि हम खुद को इनके अनुरूप ढालें।