कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा सोमवार को पेश किए गए बजट में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, इससे अर्धसैनिक बलों के 20 लाख परिवारों में भारी रोष व्याप्त है।
इन बलों को उम्मीद थी कि बजट में उन्हें सेना की तरह 'वन रैंक वन पेंशन' का फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं, जिस तरह तीनों सेनाओं के लिए बजट में सौ नए सैनिक स्कूल खोलने की बात कही गई है, वैसे ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों व जवानों के बच्चों के लिए एक भी नया स्कूल खोलने की घोषणा नहीं हुई।
महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, वित्त मंत्री द्वारा द्वारा अपने बजट में 'वन पेंशन वन राशन कार्ड' योजना लागू करने की घोषणा बजट में की गई, लेकिन पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के लिए 'वन रैंक वन पेंशन' लागू करने बाबत कोई जिक्र नहीं किया गया।
तीनों सेनाओं के लिए 100 नए सैनिक स्कूल खोले जाने की घोषणा बजट में की गई है। पैरामिलिट्री जवानों के लिए अर्धसैनिक स्कूल खोलने की एसोसिएशन की पुरानी मांग को पूरी तरह से नकार दिया गया। जीएसटी के चलते अर्धसैनिक बलों की सैंट्रल पुलिस कैंटीन (सीपीसी) बाजार भाव पर आ गई है।
कैंटीन पर जीएसटी टैक्स की रियायत न देने से लाखों पैरामिलिट्री परिवारों में सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों के साथ सौतेले व्यवहार को दर्शाता है। एसोसिएशन ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन व गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात कर उन्हें कई बार ज्ञापन सौंपे गए थे।
रणबीर सिंह के मुताबिक, बेहतर होता कि इन बलों के जवानों के लिए दोबारा से पुरानी पैंशन बहाली का ऐलान किया जाता। ये वही जवान हैं, जिनके बीच में प्रधानमंत्री मोदी हर साल दिवाली मनाते हैं। केंद्रीय सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों की उपेक्षा व सौतेले व्यवहार के खिलाफ 12 फरवरी को जंतर-मंतर पर विशेष प्रदर्शन किया जाएगा।