यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59 हजार रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है।
आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है।
मामला अब रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाले ईजीओएम के पास जाएगा
क्या कैबिनेट सचिव से संपर्क करना जल्दबाजी थी, जबकि सचिवों की समिति का औपचारिक गठन अभी बाकी है। उसके कार्यक्षेत्र की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है, एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस सवाल के जवाब में कहा, यह जल्दबाजी नहीं, बल्कि समय पर उठाया गया कदम है। हितधारकों से परामर्श विफल होने और कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने के बाद, यह मामला अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के पास जाएगा। इससे पहले, यह आवश्यक है कि सभी संबंधित सचिवों को कर्मचारियों की स्थिति से पूरी तरह अवगत कराया जाए।
उन्होंने कहा, यूएफओई को आशंका है कि रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) सचिवों की समिति के समक्ष बहिष्कार का औचित्य या उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार द्वारा किए गए वादे ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि हमने 22 दिसंबर, 2025 को अपना पत्र अग्रिम रूप से प्रस्तुत किया था। उसमें संवैधानिक सुरक्षा उपायों का हवाला दिया गया। यूएफओई ने तर्क दिया है कि रक्षा क्षेत्र के नागरिक कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के रूप में सेवानिवृत्त होने का अधिकार देता है।
मंच का सवाल- सरकार मामले को लंबा और जटिल क्यों बना रही
मंच ने सवाल उठाया है कि इन सुरक्षा उपायों से अवगत होने के बावजूद सरकार इस मामले को 'अनावश्यक रूप से लंबा और जटिल' क्यों बना रही है। श्रीकुमार ने कहा, 'हमें विश्वास है कि सचिवों की समिति, हमारी याचिका की जांच करने के बाद सकारात्मक रुख अपनाएगी। ईजीओएम को सभी 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के केंद्रीय सरकार के दर्जे को बरकरार रखने वाली अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करेगी। इससे पहले सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रतिबद्धता जताई थी। अब यह मामला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के औपचारिक गठन और उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन सबसे बड़े संगठित नागरिक कार्यबलों में से एक के भविष्य की सेवा शर्तों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।